
Gargi Santosh
गार्गी संतोष, जी मीडिया के India.com में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, हेल्थ, टेक्नोलॉजी, और ... और पढ़ें
आज पूरे देश में सुहागनों ने अपने पति की लंबी उम्र सुख के लिए करवा चौथ का व्रत रखा है. यह दिन हर साल कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाता है, और इसे सुहागन स्त्रियों का सबसे बड़ा पर्व माना गया है. परंपरा के अनुसार, दिनभर पूजा-पाठ, श्रृंगार और भगवान शिव-पार्वती की आराधना के बाद रात को चांद निकलने पर पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोला जाता है.
अब खबर मिल रही है देश की दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई हिस्सों में चांद दिखाई दे गया है. जैसे ही चांद निकला, हर ओर खुशियों की लहर दौड़ गई और महिलाएं छलनी से अपने पति का चेहरा देखकर व्रत खोलने लगीं.
#WATCH चंडीगढ़: चांद देखने के बाद महिलाओं ने #KarwaChauth का व्रत खोला। pic.twitter.com/Brgj5FxGOL
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 10, 2025
उत्तर प्रदेश (यूपी), बिहार व उत्तराखंड के कई हिस्सों में भी करवा चौथ का चांद दिखा. सुहागिनों ने चंद्र दर्शन कर व्रत खोला.
बता दें करवा चौथ के दिन संध्याकालीन पूजा का विशेष महत्व माना गया है. इस बार पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 56 मिनट से लेकर 7 बजकर 10 मिनट तक रहा. इस समय भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और चौथ माता की पूजा की जाती है. महिलाएं लाल या गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करके, मिट्टी के करवे में जल भरकर पूजा करती हैं. पूजा थाल में दीपक, चावल, फूल, मिठाई और कर्पूर रखकर चौथ माता को भोग लगाया जाता है. बाद में महिलाएं चौथ माता से अपने पति की लंबी आयु, और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं.
करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन के बाद पति का चेहरा छलनी से देखने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है. ऐसा कहा जाता है कि छलनी के छेदों से कई प्रतिबिंब बनते हैं, जो पति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और दीर्घायु का प्रतीक माने जाते हैं.
मान्यता है कि जब महिला चंद्रमा को जल अर्पित करने के बाद छलनी से अपने पति का चेहरा देखती है, तो उनके रिश्ते में प्रेम, विश्वास और सौभाग्य बढ़ता है. इसके बाद पति पत्नी को जल पिलाकर व्रत खुलवाता है – जिसे अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना गया है.
पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार की पुत्री करवा ने अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था. लेकिन भाइयों की चाल से उसने झूठे चांद को देखकर व्रत तोड़ दिया, जिसके बाद उसके पति की मृत्यु हो गई. करवा ने पूरे साल अपने पति के शव के पास बैठकर तपस्या की और अगले करवा चौथ पर अपनी भाभी के सहयोग से पति को पुनर्जीवित कर लिया. तब से यह व्रत नारी के प्रेम, त्याग और विश्वास का प्रतीक बन गया. करवा चौथ सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में वैवाहिक जीवन की अटूट डोर का उत्सव है.
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