श्रीनगर: कश्मीर (Kashmir) में एक महिला को प्रसव संबंधी समस्या होने पर भारतीय सेना (Indian Army) के कल्याणकारी दल “खैरियत” के जवानों ने कमर तक गहरी बर्फ में पैदल चलकर महिला (Pregnant Lady) को समय पर अस्पताल पहुंचाया जहां उसने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया. उत्तरी कश्मीर स्थित बारामुला के तंगमर्ग क्षेत्र के दर्द पोरा गांव निवासी रियाज मीर ने मंगलवार को परेशानी की अवस्था में सेना के दल को कॉल कर सूचना दी कि उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा हो रही है और उसका परिवार भारी बर्फबारी के कारण अस्पताल ले जाने में असमर्थ हैं. Also Read - Jammu and Kashmir: जम्मू कश्मीर के शोपियां में मुठभेड़ में तीन आतंकवादी ढेर

सेना के एक सूत्र ने यह जानकारी दी. शमीमा नामक महिला को प्रसव संबंधी गंभीर समस्या हो गयी थी जिसके कारण उसकी और उसके बच्चे की जान खतरे में थी. सूत्र ने बताया कि कॉल का उत्तर देने के बाद उपलोना गांव स्थित सेना के बेस कमांडर बिना समय गंवाए एक स्थानीय चिकित्सा अधिकारी के साथ बर्फ में पांच किलोमीटर पैदल चलकर रियाज मीर के पास पहुंचे. Also Read - LoC पार कर आए युवक को मिठाई और कपड़े के साथ वापस भेजा, पाकिस्‍तानी अधिकारियों को सौंपा

इसके बाद सेना की पूरी इकाई हरकत में आ गई और तुरंत तीन दल बनाए गए. सेना के एक अधिकारी ने बताया कि एक दल ने प्रसूता महिला के लिए सड़क का रास्ता साफ किया, दूसरे दल ने हेलिपैड तक बर्फ साफ की और तीसरे ने कनिसपोरा तक बर्फ हटाकर बारामुला जिला मुख्यालय से क्षेत्र को जोड़ने वाला रास्ता साफ किया. Also Read - Indian Army Recruitment 2021 Rally: भारतीय सेना में बिना परीक्षा के पा सकते हैं नौकरी, 8वीं, 10वीं पास जल्द करें आवेदन

सेना के सौ से अधिक जवानों और 25 नागरिकों ने छह घंटे चले अभियान में हिस्सा लिया और महिला को स्ट्रेचर पर लिटाकर कमर तक गहरी बर्फ में पैदल ही उपलोना तक ले जाया गया. उपलोना पहुंचकर महिला को सेना की एम्बुलेंस में सेना के एक चिकित्सा अधिकारी के साथ बारामुला अस्पताल भेज दिया गया. सेना के जवान रास्ते भर एम्बुलेंस के आगे बर्फ हटाते रहे. एक अधिकारी ने बताया कि सेना का दल मीर के परिवार के साथ तब तक रहा जब तक महिला ने बच्चे को जन्म नहीं दे दिया.

कश्मीर स्थित पंद्रहवीं कोर के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल के जे एस ढिल्लों ने कहा, “सेना के अधिकारियों और जवानों ने महिला को बचाने के लिए बहुआयामी रणनीति अपना कर प्रशसंनीय कार्य किया है.” जनरल ढिल्लों ने “खैरियत” दल बनाने के निर्देश दिए थे. इन दलों ने अपने मोबाइल नंबर गांव के निवासियों को दिए हैं ताकि वे आपातकालीन स्थिति में सेना से संपर्क कर सकें.