पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में पढ़ रहे जम्मू-कश्मीर के छात्रों ने पुलवामा आतंकी हमले की निंदा की और अशांत उत्तरी राज्य और देश के लोगों से कहा कि ऐसा कोई कदम न उठाए जिससे अविश्वास पैदा हो. यहां मीडिया से बातचीत करते हुए जम्मू-कश्मीर के कई छात्रों ने कहा कि उन्हें पुणे बहुत सुरक्षित लगा और यहां के लोग संवेदनशील हैं. फिजियोथेरेपिस्ट के तौर पर यहां काम करने वाले मुख्तार अहमद ने कहा, ‘‘विभिन्न शहरों से खबरें आ रही हैं कि पुलवामा हमले के मद्देनजर कश्मीरी छात्रों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है. मैं अपने साथी भारतवासियों से अपील करना चाहूंगा कि उन्हें चोट न पहुंचाएं. मैं अपने कश्मीरी भाइयों से भी कहना चाहूंगा कि किसी भी तरह के उकसावे के काम में शामिल नहीं हों.’

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उन्होंने कहा कि आतंकवादी जम्मू-कश्मीर और देश के बाकी हिस्सों के बीच एक दरार पैदा करना चाहते हैं और मुल्क के अलग अलग हिस्सों में कश्मीरी छात्रों का उत्पीड़न सिर्फ उनके नापाक मंसूबों में मददगार होगा. यहां पूना कॉलेज में कश्मीरी छात्र जावेद वानी ने कहा कि अपने गृह राज्य के छात्रों पर हमले की खबर आने के बाद उनमें से कई वापस जम्मू कश्मीर जाना चाहते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं करने का फैसला किया.

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उन्होंने कहा, ‘‘हमने उन्हें समझाया कि पुणे सच में हमारे लिए एक सुरक्षित शहर है. इन छात्रों ने वापस जाने की अपनी योजना को छोड़ दिया. पुणे के लोग संवेदनशील और मिलनसार हैं. हमने पुणेवासियों से कोई समस्या नहीं हुई है.’’ एक कश्मीरी छात्र ने बताया कि जम्मू कश्मीर में रहने वाले उसके माता-पिता उसे पुणे भेजने के लिए राजी नहीं थे लेकिन अब वे नहीं चाहते हैं कि वो वापस अपने राज्य जाए क्योंकि उसने उन्हें बताया कि उसने यहां एक भी बंदूक नहीं देखी है.