परंपराओं से सजी कथावाचक इंद्रेश जी की शादी, वैदिक विवाह को लेकर बढ़ी दिलचस्पी, जानें क्या है इस शादी का महत्व

प्रसिद्ध भागवत कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय जी की शादी हो गई है. वैदिक रीति-रिवाजों और धूमधाम से संपन्न हुई ये शादी पूरे देश में चर्चा का विषय बन रही है क्योंकि इस विवाह को पूरे पारंपरिक वैदिक विधि-विधान से पूरा किया गया.

Published date india.com Published: December 6, 2025 2:43 PM IST
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कथावाचक इंद्रेश जी की शादी इन दिनों देश में चर्चा का विषय बन गई है. बता दें कि ये शादी अपनी भव्य सजावट और आधुनिक रस्मों के लिए नहीं बल्कि वैदिक परंपराओं से संपन्न हुई. इस विवाह को आधुनिक रीति-रिवाजों से हटकर वैदिक विवाह संस्कारों के साथ संपन्न किया गया.

ये पूरा विवाह मंत्रोच्चार, हवन-यज्ञ और वेद मंत्रों की गूंज के साथ संपन्न हुआ, जिसकी सोशल मीडिया पर खूब तारीफे हो रही हैं. इंद्रेश जी के शादी के कार्ड पर भी ये साफ लिखा था कि ये विवाह पूरे वैदिक तरीको, मंत्रों और पुरानी परंपराओं से सपंन्न किया गया. जिसके बाद इस शादी को जानने की दिलचस्पी लोगों में काफी बढ़ गई है. लोग के मन में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर वैदिक विवाह क्या होता है और ये बाकी शादियों से किस तरह अलग है.

अपनी शादी को लेकर पंडित इंद्रेश उपाध्याय जी ने खुद बताया, ‘आज के समय में जब ज्यादातर शादियां फिल्मी अंदाज में हो रही हैं, हमने सोचा कि कम से कम अपनी शादी को तो पूरी तरह वेदों के अनुसार करें, ताकि आने वाली पीढ़ी को भी पता चले कि हमारा वैदिक विवाह कितना सुंदर और वैज्ञानिक है.

सोशल मीडिया पर लोगों ने दिखाई उत्सुकता

पंडित इंद्रेश उपाध्याय जी इस शादी की खास बात ये थी कि इसमें न तो कोई बारात में नाच-गाना हुआ, न किसी तरह की कोई डांस पार्टी और न ही शराब या मदिरा का आयोजन. इस शादी में मेहमानों को केवल सात्विक भोजन ही परोसा गया था. इस शादी के संपन्न के होने के बाद इस शादी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई तो युवाओं में इस वैदिक विवाह को लेकर उत्सुकता जाग उठी. सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने लिखा, हम भी अपनी शादी वैदिक तरीके से करेंगे.’

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क्या होता वैदिक विवाह?

वैदिक विवाह हिंदू धर्म का सबसे पुराना विवाह है. आपको बता दें कि इस पवित्र विवाह की जड़े ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद से जुड़ी हुई हैं. बता दें कि ये विवाह कोई आधुनिक विवाह नहीं है बल्कि ये विवाह पूरे प्राचीन परंपराओं के साथ संपन्न किया जाता है. इस विवाह में कोई दिखावा नहीं होता. ये विवाह मंत्रों, अग्नि और ऋषि-मुनियों की प्राचीन परंपराओं पर पूरी तरह से आधारित है. इस विवाह को केवल एक शादी या उत्सव नहीं बल्कि एक संस्कार माना जाता है. इस विवाह में अग्नि के सामने मंत्रों का उच्चारण और फेरे होते हैं. फेरों के समय दंपत्ति एक-दूसरे को सम्मान, विश्वास, सुख-दुख एक साथ रहने का वादा करते है.

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