कठुआ गैंगरेप: लेडी ऑफिसर ने कहा- आरोपियों को बचाने का था भारी दबाव पर देवी मां का आशीर्वाद हमारे साथ था

कठुआ रेप और मर्डर केस की जांच को अंजाम तक पहुंचाने वाली महिला पुलिस अधिकारी श्‍वेतांबरी शर्मा को इस काम को मुकाम तक पहुंचाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

Updated: April 16, 2018, 6:08 PM IST

नई दिल्‍ली. जम्‍मू-कश्‍मीर के कठुआ रेप और मर्डर केस की जांच को अंजाम तक पहुंचाने वाली महिला पुलिस अधिकारी श्‍वेतांबरी शर्मा को इस काम को मुकाम तक पहुंचाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. जम्‍मू की रहने वाली क्राइम ब्रांच में तैनात डिप्‍टी एसपी श्‍वेतांबरी शर्मा ने कहा कि आरोपियों ने जांच को प्रभावित करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. उन्हें तमाम विपरीत स्थितियों का सामना करते हुए इस जांच को अंजाम तक पहुंचाना पड़ा. आरोपियों से जुड़े लोगों ने उन्हें अपमानित और निराश करने की सारी सीमाएं लांघ दी. लेकिन श्‍वेतांबरी का इरादा कुछ और था. श्‍वेतांबरी ने मामले की जांच से जुड़ी दिक्कतों के बारे में ‘द क्विंट’ से विशेष बात की. श्‍वेताम्‍बरी जम्मू-कश्मीर की क्राइम ब्रांच की एसआईटी की एक मात्र महिला सदस्‍य हैं. उनका कहना है कि आठ साल की बच्ची से रेप और मर्डर में जिन लोगों के शामिल होने का अंदेशा था, उनके रिश्‍तेदारों और वकीलों ने उनकी जांच में बाधा पहुंचाने की कोशिश की.

श्‍वेताम्‍बरी के मुताबिक जम्‍मू के कठुआ जिले के हीरानगर के रासना गांव की एक आठ साल की बच्‍ची 10 जनवरी से लापता थी. उसके अपहरण होने के आरोपों के बीच पुलिस लड़की को खोजने में नाकाम रही. इसके कारण जम्‍मू-कश्‍मीर की विधानसभा की कार्रवाई भी बाधित हुई. इसके बाद 17 जनवरी को लड़की मृत मिली.

भारी बाधाओं के विपरीत काम किया
वर्ष 2012 बैच की जम्‍मू पुलिस सेवा की अधिकारी श्‍वेतांबरी ने बताया, ”हमने भारी बाधाओं के विपरीत काम किया, ऐसे वक्‍त में हम बहुत निराश थे, खासतौर पर हमने ये जाना कि हीरानगर पुलिस स्‍टेशन के लोगों को केस  छिपाए रखने के लिए रिश्‍वत दी गई है और उन्‍होंने मारी गई लड़की के कपड़ों को धुल दिया और साक्ष्‍य के मटीरियल्‍स को नष्‍ट कर दिया. तब भी हमने इस रेप और मर्डर मिस्‍ट्री का पवित्र नवरात्र‍ि के दौरान खुलासा कर लिया. मैं मानती हूं कि एक दैवीय हस्‍तक्षेप से षड्यंत्रकारियों को न्‍याय की प्रक्रिया तक लाया जा सका. मैं मानती हूं कि दुर्गा माता का हाथ हमारे सिर पर था.

मजि‍स्‍ट्रेट ने वयस्‍क को बताया था नाबालिग
आरोपियों में शामिल एक युवक ने बंधक बनाई गई बच्‍ची से दो बार रेप किया और निर्दयता से उसका मर्डर करने के बाद उसकी बॉडी फेंक दी थी. उसे नाबालिग घोषित कर दिया गया था. एसआईटी ने उसके स्‍कूल रिकॉर्ड के आधार पर उसे वयस्‍क साबित किया. सरकारी मेडिकल कॉलेज जम्‍मू की टीम ने भी उसे 19 से 20 साल का बताया.

धर्म के नाम पर प्रभावित करने की कोशिश
श्‍वेतांबरी ने बताया, ”अधिकतर आरोपी ब्राम्‍हण थे. उन्‍होंने मुझे प्रभावित करने की कोशिश की और तरह-तरह से ये बात कही कि वे एक धर्म और एक जाति से हैं और मैं उन्‍हें एक मुस्लिम लड़की से रेप और मर्डर में  आरोपी न बनाऊं. मैंने उन्‍हें बताया कि एक पुलिस अफसर होने के नाते मेरा कोई धर्म नहीं है और मेरा धर्म केवल पुलिस की वर्दी है.”

धमकियां मिलीं, रास्‍ते रोके गए
श्‍वेताबरी ने कहा, ” जब सभी चालें फेल हो गईं तो आरोपियों के परिवारों और सहानुभूति रखने वालों ने ब्‍लैकमेलिंग और धमकी का रास्‍ता अख्तियार किया. वे लाठियां लेकर आए, नारे लगाते रहे, तिरंगा लेकर रैलियां निकालीं और कई गांवों में हमारे रास्‍ते रोके गए. लेकिन हम ताकत और धैर्य के साथ जमीन पर डटे रहे. अपना काम पूरा किया और वो भी पूरे दृढ़ निश्‍चय, समर्पण और पेशेवर तरीके से.”

मंदिर में घुसना पड़ा
महिला पुलिस अफसर ने बताया कि निर्मम तरीके से मारी गई बच्‍ची को निजी देव स्‍थान में जाकर खोजना एक बेहद मुश्किल काम था. यह मंदिर एक रिटायर्ड गिरदवार का है और उसका नाम सांजी राम है. श्‍वेतांंबरी ने बताया कि वह पहली अफसर थीं, जो एक मजिस्‍ट्रेट की मौजूदगी में देवस्‍थान में घुसी और साक्ष्‍य जुटाए, जिसमें विक्‍टिम के बिखरे हुए बाल शामिल थे. फॉरेंसिक साइंस रिपोर्ट ने इस बात की पुष्‍ट‍ि भी कर दी है कि बालों के सैम्‍पल मारी गई आठ साल की बच्‍ची के ही थे.

एसएचओ ने नहीं सुनी, चारो ओर से धमकियां
श्‍वेतांबरी ने बताया कि जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान हम कोर्ट में मौजूद थे ताकि अभियोजन पक्ष की ओर से सही ढंग से पक्ष रखा जा सके. लेकिन बचाव पक्ष की ओर से बहस करने वाले वकील के अलावा 10 से 20 वकीलों ने प्रदर्शन किया. हमने लगातार कोर्ट के बाहर भीड़ का सामना किया. हमने कुछ नहीं किया. फिर एसएचओ से वकीलों के विरोध को लेकर एफआईआर दर्ज करने को कहा. जब उसने ऐसा नहीं किया तो हम एसआईटी हेड के जरिए जिला मजिस्‍ट्रेट के पास पहुंचे. वहां चारो ओर अराजकता और धमकियां थीं.

सबसे ज्‍यादा भयावह पल
श्‍वेतांबरी ने बताया कि उसके लिए वह पल सबसे ज्‍यादा भयावह था जब अपने बेटे की उम्र की बच्‍ची के रेप और मर्डर के बारे में ग्राफिक डिटेल से आरोपियों से पूछताछ करनी थी. यह भयावह था, लेकिन दुर्गा माता आशीर्वाद था. उन्‍होंने मुझे साहस किया और मैंने सभी जरूरी सवाल एसआईटी टीम के पुरुष सदस्‍यों के सामने पूछे. उन्‍होंने संकेत किया देव स्‍थान के संरक्षक बेटा मेरठ में बीएससी एग्रीकल्‍चर की पढ़ाई कर रहा था. वह वहां से अपनी वासना की पूर्ति के लिए लौटा था. उसे नवरात्र के पहले दिन और सांजीराम को तीसरे दिन गिरफ्तार किया.

रातों जागती रही, मैं पति से नहीं मिल सकी
डीएसपी श्‍वेतांबर ने बताया कि यह सबसे कठिन टास्‍क था. मुझे नींद नहीं आई. मैं रातों जागती रही. मैं रिश्तेदारी या किसी उत्सव में पति के साथ नहीं जा पाती थी. उस दौरान मैं अपने बच्‍चे की सही ढंग से देखभाल नहीं कर पाई. उस वक्त मेरा बेटा परीक्षा की तैयारी कर रहा था. लेकिन भगवान का शुक्र है कि हमने अपने काम को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. मैं और मेरी टीम के अन्‍य सदस्‍य संतुष्‍ट हैं कि हमने कुछ किया. हम रेप और हत्‍या के आरोपियों को न्याय के कटघरे तक ले गए.

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