जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप के मामले में विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है. इस माममें में मुख्य आरोपी के वकील ने महबूबा मुफ्ती को ‘जेहादी मुख्यमंत्री’ करार दिया है. उसने कहा है कि जम्मू के हिंदू बाहुल्य इलाके का जनसांख्यिकी बदलाव के लिए वह इस्लाम फासीवादी सांप्रदायिक एजेंडा चला रही हैं.Also Read - सरकार बिना सबूत लोगों को गिरफ्तार कर रही है,... नतीजे खतरनाक होंगे: महबूबा मुफ्ती

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए वकील अंकुर शर्मा ने कहा, महबूबा मुफ्ती जिहादी हैं. वह गौकशी और गोवंशी तस्करी को कानूनी मान्यता देती हैं. वह गुज्जर्स और बकेरवाला को जनजातीय कहती हैं. ऐसे में मुसलमान कौन है? उन्होंने कहा कि आरपीसी के सेक्शन 188 उनके खिलाफ नहीं लागू किया जाएगा. Also Read - ये कैसा सिस्टम है, कोई हमारे मुल्क की गोली से मरे वो ठीक है, मिलिटेंट की गोली से मरे वो गलत: महबूबा मुफ्ती

सांजी राम के वकील हैं शर्मा
बता दें कि अंकुर शर्मा सांजी राम के वकील हैं. क्राइम ब्रांच की चार्जशीट में बच्ची से रेप और हत्या का मास्टमाइंड सांजी राम ही है. हिंदू महासभा अध्यक्ष और महाराष्ट्र के हिंदू संगठनों से फोन आने का दावा करते हुए शर्मा ने कहा, वह हिंदू एकता मंच से जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि वे आरोपियों को सपोर्ट कर रहे हैं और सीबीआई जांच की मांग करते हैं. Also Read - आर्यन के पीछे एजेंसियां इसलिए पड़ी हैं क्योंकि उनका सरनेम खान है: महबूबा मुफ्ती

हिंदू एकता मंच के हैं सदस्य
हिंदू एकता मंच को एक शांतिपूर्ण और अहिंसक संगठन बताते हुए शर्मा ने कहा, जब लोगों पर इस्लामिक हमले होने लगे तो संगठन बना. उन्होंने दावा किया कि हुर्रियत के लोग बकेरवाल कम्युनिटी को सपोर्ट करते हैं. इसके बाद ही एक्टिविस्ट इन्हें एक अलग कम्युनिटी के तौर पर नाम देने लगे.

आरोपियों की याचिका पर विचार करेगा न्यायालय
दूसरी तरफ उच्चतम न्यायालय ने कठुआ में बच्ची के साथ रेप और उसकी हत्या के दो आरोपियों की उस याचिका पर विचार करने को हामी भर दी है. इसमें उन्होंने मुकदमे की सुनवाई जम्मू से बाहर स्थानांतरित नहीं करने और मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का अनुरोध किया है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायामूर्ति ए एम खानविलकर और डी वाई चन्द्रचूड़ की एक पीठ ने आरोपी सांजी राम और विशाल जंगोत्रा की उस याचिका पर विचार किया, जिसमें दोनों ने मामले की सुनवाई सीबीआई से करवाने की मांग करने वाली पीड़िता के पिता की याचिका में पक्षकार बनने का अनुरोध किया है.

जान का बताया था खतरा
इससे पहले, पीड़िता के पिता ने परिवार, उनके एक दोस्त और उनकी वकील दीपिका सिंह राजावत की जान को खतरा बताते हुए शीर्ष अदालत का रूख किया था. मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच के प्रति संतुष्टि व्यक्त करते हुए पीड़िता के पिता ने सुनवायी कठुआ अदालत से चंडीगड़ स्थानांतरित करने की मांग भी की थी. आरोपी इसके विपरित सीबीआई जांच और मामले की सुनवाई कठुआ की अदालत में ही करवाने की मांग कर रहे हैं.