जम्मू: कठुआ रेप मामले में आखिर शनिवार को बार एसोसिएशन कठुआ (बाक) ने अपना वह विवादित फैसला वापस ले लिया है, जिसमें एसोशिएशन ने नाबालिग बच्ची से रेप के आठ आरोपियों का केस मुफ्त में लड़ने की घोषणा की थी. बार एसोसिएशन का यह फैसला उस वक्त आया है जब एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने की वकीलों की कोशिश पर गंभीरता से संज्ञान लिया था और कहा था कि इस तरह से बाधा डालने से न्याय व्यवस्था प्रभावित होती है.Also Read - कठुआ गैंगरेप मर्डर केस में छह दोषी करार, एक को कोर्ट ने किया बरी

बता दें कि शुक्रवार को मामले का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा कि बार एसोसिएशनों का यह कर्तव्य है कि आरोपियों या पीड़ित परिवारों की पैरवी करने वाले वकीलों के काम में बाधा नहीं डाली जाए. बाक अध्यक्ष कीर्ति भूषण ने कहा, ” हमने इस मामले में मुफ्त में मुकदमा लड़ने के प्रस्ताव को वापस ले लिया है. आरोपी किसी भी व्यक्ति की सेवा लेने और अदालत में अपना बचाव करने के अधिकार का इस्तेमाल करने को स्वतंत्र हैं.” Also Read - कठुआ रेप: वकील दीपिका लेने लगी थीं कम इंट्रेस्ट, 2-3 बार ही गईं कोर्ट, पीड़ित परिवार ने हटाया

बीते 13 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने कठुआ में मासूम बच्ची से सामूहिक बलात्कार और हत्याकांड में वकीलों द्वारा पीड़िता की वकील को अदालत में पेश होने से रोकने की घटना का संज्ञान लेते हुए बार संगठनों को नोटिस जारी कि थे. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया , राज्य बार काउंसिल , जम्मू हाईकोर्ट एसोसिएशन और कठुआ जिला बार एसोसिएशन को नोटिस जारी किए. इन सभी से 19 अप्रैल तक जवाब मांगे गए थे. (इनपुट- एजेंसी) Also Read - शानदार: सोशल मीडिया पर दो रेप पीड़िताओं के लिए मांगे थे 10-10 लाख रुपए, लोगों ने 40 लाख से भर दी झोली