नई दिल्ली: दुनिया भर के 600 से अधिक शिक्षाविदों और विद्वानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला खत (ओपन लेटर) लिखकर कठुआ और उन्नाव रेप मामलों पर अपनी नाराजगी का इजहार करते हुए उन पर देश में बने गंभीर हालात पर चुप्पी साधे रहने का आरोप लगाया है. यह लेटर ऐसे दिन आया है जब कठुआ और सूरत में नाबालिग बच्चियों के बलात्कार और हत्या और उन्नाव में एक लड़की से रेप को लेकर देशभर में आक्रोश के बीच केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रविवार को 12 वर्ष और उससे कम उम्र की बच्चियों से रेप के मामले में दोषी पाए जाने पर मृत्युदंड सहित कड़े दंड के प्रावधान वाले अध्यादेश को मंजूरी दी है.

प्रधानमंत्री को संबोधित लेटर में कहा गया है कि वे कठुआ और उन्नाव और उनके बाद की घटनाओं पर अपने गहरे गुस्से और पीड़ा का इजहार करना चाहते हैं. पत्र में लिखा गया , ‘ हमने देखा है कि देश में बने गंभीर हालत पर और सत्तारूढ़ों के हिंसा से जुड़ाव के निर्विवाद संबंधों को लेकर आपने लंबी चुप्पी साध रखी है. इस लेटर पर न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय , ब्राउन विश्वविद्यालय , हार्वर्ड एवं कोलंबिया विश्वविद्यालयों एवं विभिन्न आईआईटी के शिक्षाविदों और विद्वानों ने हस्ताक्षर किए हैं.

विदेश में भी प्रदर्शन
जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची से हुए गैंगरेप और हत्या के बाद देश ही नहीं विदेश में भी लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था. लोगों में इस घटना को लेकर बहुत ज्यादा आक्रोश देखा गया था, घटना के बाद जिस तरह से पुलिस को कोर्ट में चार्जशीट दायर करने से वकीलों द्वारा रोका गया उससे लोग काफी नाराज हुए थे. देशभर में लोगों ने इस घटना के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार किया था.

आईएमएफ प्रमुख ने जताई थी नाराजगी
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टीन लगार्ड ने भी इस वीभत्स घटना पर नाराजगी जाहिर की थी और नरेंद्र मोदी सरकार से महिला सुरक्षा के मुद्दे पर ज्यादा ध्यान देने की अपील की थी. इससे पहले आईएमएफ प्रमुख लगार्ड ने कठुआ में आठ साल की बच्ची से रेप और हत्या की घटना को वीभत्स करार दिया था और कहा था, ‘‘ भारत में जो कुछ हुआ है वह वीभत्स है. मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शुरू कर सभी भारतीय पदाधिकारी इस पर ज्यादा ध्यान देंगे क्योंकि भारत में महिलाओं के लिए यह जरूरी है.’

लगार्ड ने कहा था, ‘मैं जब पिछली बार दावोस में थी तो प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के बाद मैंने उनसे कहा था कि उन्होंने भारत की महिलाओं का पर्याप्त रूप से जिक्र नहीं किया और सवाल सिर्फ उनके बारे में बातें करने का नहीं है.’ हालांकि लगार्ड ने ये भी कहा था कि यह आईएमएफ की नहीं बल्कि उनकी निजी राय है. लगार्ड ने कहा, ‘वैसे यह आईएमएफ की आधिकारिक राय नहीं है. यह मेरी राय है.’