हैदराबाद: तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के समय से पहले चुनाव कराने के फैसले से चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है कि ऐसी कौन सी वजह रही जिसके चलते उन्होंने यह फैसला किया. Also Read - पश्चिम बंगाल में बोले जेपी नड्डा, बहुत जल्द लागू होगा नागरिकता संशोधन कानून

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तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) से जुड़े सूत्रों ने कहा कि उद्देश्य राज्य में व्याप्त ‘‘फील गुड फैक्टर’’ से लाभ उठाने का है. सूत्रों ने दावा किया कि के चंद्रशेखर राव ‘‘आशावादी’’ हैं क्योंकि उनकी लोकप्रियता में गिरावट नहीं आई है और उनकी व्यक्तिगत छवि लगातार मजबूत हो रही है. उन्होंने कहा कि ‘‘विचार लोगों के सकारात्मक मूड को भुनाने का है.’’ Also Read - पीएम नरेंद्र मोदी का बयान- 6 सालों में हुए चौतरफा काम, अब बढ़ा रहे हैं उसकी गति और दायरा

इस संबंध में एक विपक्षी दल के एक नेता ने कहा कि राव एक ‘‘बहुत ही सुरक्षित खेल’’ खेलने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने पहले चुनाव कराने के कदम को मुख्यमंत्री की ‘‘उत्तराधिकार योजना’’ मानते हुए कहा, ‘‘वह (राव) राज्य में दोबारा जीतना चाहते हैं और इसे (उत्तराधिकार को) के टी आर (अपने बेटे के टी रामाराव) को सौंपना चाहते हैं.’’

नेता ने कहा, ‘‘वह (राव) एक नायक बनना चाहते हैं. आप केवल तभी नायक बनते हैं जब आप सत्तारूढ़ (राजग) सरकार से लड़ते हो. वह क्षेत्रीय नायक बनना चाहते हैं, दिवंगत जयललिता (तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री) की तरह. वह वैसी ही राजनीति करना चाहते हैं.’’

उन्होंने कहा कि टीआरएस अगले लोकसभा चुनाव में ज्यादा सीटें जीतने वाले गठबंधन के साथ जाएगी. कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि राव नहीं चाहते कि उनके विरोधी एकजुट होकर काम करें. उन्होंने कहा कि वह उन्हें संसाधन जुटाने, गठबंधन के लिए काम करने और चुनाव तैयारियों के लिए कम समय देना चाहते हैं.

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इस बीच, भाजपा के एक सदस्य ने कहा कि राव राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभाने की आकांक्षा रखते हैं. नेता ने कहा कि राव राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाना चाहते हैं और यह तभी संभव है वह जब राज्य में जीतें.

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इससे पहले तेलंगाना मंत्रिमंडल ने गुरुवार को राज्य विधानसभा भंग करने की सिफारिश की. इसके बाद राज्यपाल ने विधानसभा भंग कर दी. करीब 15 दिनों से विधानसभा भंग करने और जल्दी चुनाव कराए जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं. तेलंगाना विधानसभा का चुनाव अगले साल लोकसभा चुनाव के साथ निर्धारित है, लेकिन सत्तारूढ़ टीआरएस दोनों चुनाव अलग-अलग कराए जाने में राजनीतिक लाभ देख रही है. पार्टी को मई 2014 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में राज्य में जीत मिली थी. उसने 119 सदस्यीय विधानसभा में 63 सीटों पर जीत हासिल की थी.