नई दिल्ली। नेवी चीफ एडमिरल सुनील लांबा ने कहा कि हिंद महासागर में पिछले कुछ समय में चीनी जहाजों की मौजूदगी बढ़ी है. हमारे सहयोगी चैनल वियॉन (WION) को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में नेवी चीफ ने कहा कि भारतीय समुद्री सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और भारतीय नौसेना हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी पर बारीकी से नजर रखे हुए है.Also Read - Video: चीन के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर भारत-US ने हिंद महासागर में किया संयुक्‍त युद्धाभ्‍यास

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नौसेना प्रमुख ने कहा, हिंद महासागर एकमात्र ऐसा महासागर है जिसका नाम किसी देश पर पड़ा है. हमारी एक महान समुद्री विरासत है. हिंद महासागर में चीनी जहाजों की मौजूदगी साल 2008 से ही है और उनके पास कई जहाज और पनडुब्बियां हैं. उन्होंने कहा, हमें पूरी तरह खबर है कि पिछले सालभर से यहां क्या हो रहा है. हम भी यहां रणनीति के मुताबिक मिशन आधारित तैनाती कर रहे हैं. Also Read - मालाबार नौसैन्य अभ्यास 3 नवंबर से, भारत समेत 4 प्रमुख लोकतंत्र लेंगे हिस्सा

नौसेना प्रमुख ने कहा कि साल 2014 से जब से एक्ट ईस्ट पॉलिसी शुरू हुई है, इसके तहत हम अपने पूर्व के पड़ोसियों के साथ सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं. म्यांमार, थाइलैंड और वियतनाम के साथ समुद्री सीमाओं की पेट्रोलिंग करते हैं. हम उनके सुरक्षाकर्मियों को ट्रेनिंग भी देते हैं. एडमिरल लांबा ने ये भी कहा कि अमेरिका और जापान जैसी बड़ी ताकतों के साथ सहयोग भारत के साथ बेहद महत्वपूर्ण है.

एडमिरल लांबा ने कहा कि मालाबार युद्धाभ्यास 1993 में भारत-अमेरिका के बीच शुरू हुआ  था. 1993 से अब तक स्कोप और इसका आकार बढ़ता ही गया है. ्ब जापान इसका स्थायी सदस्य बन गया है. हम एक-दूसरे से सीखते हैं. किसी देश को इससे कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि ये उनके खिलाफ नहीं है.

बता दें कि भारतीय नौसेना तभी से सतर्क है जब से ये खबर आई कि चीन, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह में परमाणु पनडुब्बी तैनात करना चाहता है. ग्वादर बंदरगाह भारतीय समुद्री सीमा से ज्यादा दूर नहीं है. चीन के कई जहाज ग्वादर में दिखाई देते हैं.