तिरुवनंतपुरम: माकपा के दो छात्र कार्यकर्ताओं पर यूएपीए के तहत आरोप लगाने को लेकर आलोचनाओं का शिकार हो रहे केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने रविवार को स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इन कानून के तहत आरोप तय करने के पुलिस के फैसले से सहमत नहीं है. पुलिस ने माकपा के छात्र कार्यकर्ताओं को कथित रूप से माओवादियों से सहानुभूति रखने और उनके कुछ पर्चे बांटने के आरोप में शनिवार सुबह गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया था. छात्रों की आयु लगभग 20 वर्ष है. विजयन ने इस मामले पर पहली बार प्रतिक्रिया दी है.

उन्होंने कहा कि सरकार मामले की जांच करेगी और आवश्यक कदम उठाएगी. विजयन ने कहा कि यदि पुलिस किसी पर यूएपीए के तहत आरोप लगाती है तो इसका यह अर्थ नहीं है कि यह तत्काल प्रभावी हो जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार और यूएपीए पर राज्य द्वारा नियुक्त समिति को मामले की जांच करनी होगी. विजयन ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को यूएपीए के खिलाफ बोलने का अधिकार नहीं है.

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इस बीच, यूएपीए समिति की अगुवाई करने वाले न्यायमूर्ति पी एस गोपीनाथन ने कोच्चि में संवाददाताओं से कहा कि आरोपी के पास से केवल पर्चे मिलने के आधार पर यूएपीए नहीं लगाया जा सकता. ‘‘सबूत होने पर ही यूएपीए वैध होगा.’’ इससे पहले, केरल में विपक्षी कांग्रेस नीत यूडीएफ गठबंधन ने छात्र कार्यकर्ताओं पर यूएपीए लगाने को लेकर रविवार को मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से इस्तीफा मांगा.

केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्नीथला ने पत्रकारों से कहा कि विजयन जो गृह मंत्री भी हैं, को इस्तीफा देना चाहिये क्योंकि अब उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है. छात्रों ताहा फजल और अलान शुहेब के परिजनों ने पुलिस के इन दावों को खारिज किया कि वे माओवादियों से सहानुभूति रखते हैं.

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केरल के कानून मंत्री ए के बालन ने यूएपीए को ‘‘दोधारी तलवार’’ करार देते हुए कहा कि इसे लोकतांत्रिक नियमों के अनुसार काम कर रहे निर्दोष लोगों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिये. उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘हम इस बात की जांच करेंगे कि क्या इस मामले में नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज की गई.’’