तिरूवनंतपुरम: केरल के देवस्वओम मंत्री कडकमपल्ली सुरेन्द्रन ने सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले का शुक्रवार को स्वागत करते हुए कहा कि इस ‘ऐतिहासिक’ फैसले के साथ लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई अपने निष्कर्ष पर पहुंच गई है. Also Read - कोरोना वायरस के बारे में सही सूचना के लिये 24 घंटे में पोर्टल बनाये केन्द्र: सुप्रीम कोर्ट

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत के फैसले में कहा कि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लैंगिक भेदभाव है और यह परिपाटी महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करती है. मंत्री ने कहा कि फैसले को लागू करना और भगवान अय्यप्पा के मंदिर में आने वाली महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) की जिम्मेदारी है. एलडीएफ सरकार ने भगवान अय्यप्पा स्वामी मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में रही है. Also Read - Covid-19: कोरोना के चलते मजदूरों का पलायन, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- 23 लाख लोगों को दे रहे हैं खाना

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किसी भी धर्मस्‍थल पर न हो महिलाओं के साथ भेदभाव
सुरेन्द्रन ने कहा कि राज्य सरकार का यह रूख सिर्फ सबरीमला मंदिर के लिए नहीं है बल्कि यह उसका मानना है कि किसी भी धर्म स्थल पर महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए. वहीं मंदिर के तंत्री कंडारारू राजीवारू ने कहा कि हालांकि फैसला निराश करने वाला है लेकिन वह इसे स्वीकार करते हैं. उन्होंने कहा कि मैं न्यायालय के फैसले का स्वागत करता हूं. मौजूदा हालात में महिलाओं के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था करना बहुत मुश्किल है. बोर्ड को प्रबंध करना होगा.

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बोर्ड कोर्ट के फैसले को करेगा स्‍वीकार
त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड के अध्यक्ष ए. पद्मकुमार ने संवाददाताओं से कहा कि बोर्ड न्यायालय के फैसले को स्वीकार करता है. यह पूछने पर कि क्या बोर्ड इस फैसले से खुश है. उन्होंने कहा, सवाल यह नहीं है कि टीडीबी इस फैसले से खुश है या निराश. पद्मकुमार ने कहा, हम फैसले का पालन करने के लिए बाध्य हैं और हम इसे लागू करेंगे. उन्होंने कहा, महिला श्रद्धालुओं के लिए जिन सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करनी है, उस संबंध में राज्य सरकार से सलाह लेकर बोर्ड जरूरी कदम उठाएगा. इसबीच बोर्ड सदस्य के. पी. संकरा दास ने कहा कि एलडीएफ सरकार ने रूख अपनाया है और टीडीबी के लिए अलग रूख अपनाना संभव नहीं है. पंडालम राज परिवार के सदस्य शशि कुमार वर्मा का कहना है कि यह फैसला परिवार के लिए दुखदायी है.