नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम. केरल में मानसूनी बारिश और बाढ़ के कारण शुक्रवार को एक ही दिन में 106 लोगों की मौत के बीच राज्य में ऑक्सीजन की कमी और ईंधन स्टेशनों में ईंधन नहीं होने के कारण आज संकट और गहरा हो गया. राज्य में अबतक 385 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 3 लाख से ज्यादा लोगों को पलायन करना पड़ा है. बीते आठ अगस्त से अब तक केरल में जल प्रलय ने 173 लोगों की जान ले ली है. बाढ़ के कारण खूबसूरत राज्य को गहरा धक्का लगा है और पर्यटन उद्योग बहुत प्रभावित हुआ है. हजारों एकड़ खेत में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं. बुनियादी ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा है.

अलग-अलग जगहों पर फंसे 80,000 से ज्यादा लोगों को शुक्रवार को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया. इनमें 71,000 से ज्यादा लोग बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित एर्नाकुलम जिले के अलुवा क्षेत्र से थे. तीनों सेनाओं के अलावा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के जवानों ने छतों और ऊंची जगहों पर फंसे लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने का दुरूह काम फिर से शुरू किया. पहाड़ी इलाकों में पहाड़ के हिस्से जमीन पर गिरने से सड़क जाम हो रहे हैं, जिससे बाकी जगहों से उनका संपर्क टूट जा रहा है. द्वीप की शक्ल ले चुके कई गांवों में फंसे लोगों को निकालने का अभियान भी जारी है.

कई लोग फंसे
नौका से नहीं पहुंचने लायक जगहों में फंसी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित कई लोगों को सेना के हेलीकॉप्टरों से सुरक्षित जगहों पर ले जाया जा रहा है. ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन में रह रहे केरल मूल के लोगों ने टीवी चैनलों के जरिए अधिकारियों से अपील की है कि वे उनके प्रियजन की मदद करें.

सीएम ने ये कहा
राज्य के सीएम विजयन ने कहा कि हालात गंभीर बने हुए हैं. उन्होंने कहा कि 70,000 से ज्यादा परिवारों के लगभग 3.14 लाख लोगों ने राहत शिविरों में शरण ले रखी है. उन्होंने कहा कि 29 मई, जब दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में दस्तक दी थी, के बाद से 385 लोग मारे जा चुके हैं.कुछ जगहों पर बारिश में थोड़ी कमी आई लेकिन चार जिलों – पथनमथिट्टा, अलफुजा, एर्नाकुलम और त्रिचूर – में मानसून का कहर जारी है. अधिकारियों ने बताया कि एर्नाकुलम जिले के कई निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी हो गयी है। इस कारण अधिकारियों को मरीजों को निकट के अस्पतालों में भेजने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

अस्पताल में घुसा बाढ़ का पानी
अस्पतालों में बाढ़ का पानी घुस आने के कारण कई मरीजों को वहां से निकालना पड़ा. राहत शिविरों में रह रहे लोग भी खाना और पेयजल की किल्लत की शिकायत कर रहे हैं. कई पेट्रोल पंपों, यहां तक कि तिरुवनंतपुरम में भी पेट्रोल नहीं है. तिरुवनंतपुरम जिले के कई ईंधन स्टेशनों में आज लंबी-लंबी कतारें देखी गई. अधिकारियों ने प्रत्येक ईंधन स्टेशन से कहा है कि वे 3,000 लीटर डीजल और 1,000 लीटर पेट्रोल का भंडार सुरक्षित रखें ताकि राहत अभियानों में इनका इस्तेमाल किया जा सके. स्थानीय मछुआरों को राहत मिशन में शामिल देखा जा रहा है. वह अपनी नौकाओं के जरिए अलुवा, कलाडी, पेरुम्बवूर, मुवत्तूफुजा और चलाकुडी जैसी जगहों पर लोगों की मदद कर रहे हैं.

कई जगह भूस्खलन
पर्वतीय जिले इडुक्की में भूस्खलनों के कारण कई सड़कों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है. बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जगहों में शामिल वायनाड केरल के बाकी हिस्सों से कट चुका है. रनवे पर बाढ़ के कारण कोच्चि हवाई अड्डे को बंद कर दिया गया है. सूत्रों ने बताया कि कई ट्रेनें या तो रद्द कर दी गई हैं या उनके समय में फेरबदल किया गया है. बहरहाल, कोच्चि मेट्रो की सेवाएं प्रभावित नहीं हुई हैं. मौसम विभाग ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान किया है. पथनमथिट्टा, तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, अलफुजा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्नाकुलम, त्रिचूर, पालक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड और वायनाड जिलों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का पूर्वानुमान है.