नई दिल्ली: बीजेपी ने शुक्रवार को केरल के सोना तस्करी मामले में यह आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पिनरई विजयन का इस्तीफा मांगा कि इसके आरोपियों और सत्ता में बैठे लोगों के बीच घनिष्ठता है. Also Read - स्टार प्रचारक का दर्जा रद्द: कमलनाथ बोले- EC ने मुझे कोई नोटिस नहीं दिया, मेरे वकील देखेंगे इस मामले को

केंद्रीय मंत्री व केरल भाजपा के वरिष्ठ नेता वी मुरलीधरन ने पार्टी मुख्यालय में मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा, ” मुख्यमंत्री ने अपना नैतिक अधिकार खो दिया है. भाजपा और केरल की जनता मांग कर रही है कि इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री इस्तीफा दे दें.” Also Read - Bihar Assembly Election 2020 : तेजस्वी का भाजपा पर निशाना, 'पहले महंगाई इनके लिए 'डायन' थी, अब 'भौजाई' बन गई'

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य की वाम दलों की सरकार ने पहले इस मामले की जांच के लिए आदेश को कहा और अब वह केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के खिलाफ यह दावा करते हुए अदालत चली गई है कि केंद्रीय एजेंसी को जांच का अधिकार नहीं है. Also Read - यूपी में बीजेपी के लिए अब पहली चुनौती अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी, क्‍या बसपा का ग्राफ गिरेगा?

मुरलीधरन ने आरोप लगाया, ”यह दर्शाता है कि जो इस मामले में संलिप्त हैं उनकी सत्ता में बैठे लोगों से घनिष्टता है.”
उन्होंने कहा कि सोना तस्करी का यह मामला अन्य मामलों से भिन्न है, क्योंकि इसके तार सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े हैं. केंद्रीय मंत्री ने दावा कि विजयन इस मामले में पहले दिन से अपना रुख बदलते रहे हैं.

यह मामला गत 5 जुलाई को केरल के तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे से बरामद 30 किलोग्राम सोने का है. सीमा शुल्क विभाग के अलावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा भी इस मामले की जांच की जा रही है.

एनआईए को केरल सोना तस्करी मामले का संबंध डी कंपनी से होने का संदेह
केरल सोना तस्करी मामले में आतंकी संपर्कों की जांच कर रहे राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने यहां एक विशेष अदालत में संकेत दिए कि उसे संबंधित रैकेट में माफिया डॉन दाऊद इब्राहीम के गिरोह के शामिल होने का संदेह है.

180 दिन तक सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में रखने की मांग
एजेंसी ने कहा कि सोने की तस्करी से मिलने वाले मुनाफे का इस्तेमाल राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और आतंकी कृत्यों में होने की संभावना संबंधी खुफिया जानकारी है. इसने कहा कि मामले में जांच को आगे बढ़ाने के लिए 180 दिन तक सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में रखा जाना अत्यंत आवश्यक है. एजेंसी ने सभी आरोपियों की जमानत याचिकाओं का विरोध किया.