नई दिल्ली: सबरीमला मंदिर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के बाद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ केरल में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. दो दिन बाद मंदिर मासिक पूजा के लिए दोबारा खुलने जा रहा है. त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) ने तंत्री परिवार, पंडलम पैलेस के प्रतिनिधि और अयप्पा सेवा संगम के नेताओं को मंगलवार को चर्चा के लिए बुलाया है. विभिन्न हिंदू संगठन और अयप्पा श्रद्धालु मंदिर में महिलाओं को प्रवेश देने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन के खिलाफ पूरे केरल में कुछ दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. ऐसे में बातचीत का आह्वान सहमति बनाने की कोशिश समझी जा रही है. वहीं महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के खिलाफ बीजेपी का प्रदर्शन जारी है. Also Read - Coronavirus: केरल सरकार अपने कर्मचारियों का वेतन काटने के लिए अध्यादेश जारी करेगी

त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी)के अध्यक्ष ए पद्मकुमार ने बताया कि यहां उसके मुख्यालय में 16 अक्टूबर को बैठक होगी. उसमें ताझमोन तांत्री परिवार, पंडलाम राजपरिवार, अयप्पा सेवा संगम, अयप्पा सेवा समाजम, तांत्री महामंडलम, योग क्षेम सभा समेत विभिन्न पक्षों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. पद्मकुमार ने कहा,‘टीडीबी के मन में सबरीमला से जुड़े किसी भी मामले में पूर्वाग्रह नहीं है… उन्हें आने दीजिए और अपना विचार रखने दीजिए. हम उसके बाद मंदिर के सभी पहलुओं पर उपयुक्त फैसला करेंगे. Also Read - केंद्र सरकार की आपत्ति के बाद केरल सरकार ने लॉकडॉउन में दी गई छूट में किया ये बदलाव

दूसरी ओर पंडलाम राजपरिवार के प्रमुख केरल वर्मा राजा ने रविवार को कहा कि सबरीमला पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला श्रद्धालुओं के खिलाफ है और केंद्र सराकर को अनुयायियों के अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी संशोधन करना चाहिए. पंडलाम राज परिवार का सबरीमला के मुख्य देवता भगवान अयप्पा की किवदंतियों से संबंध रहा है. मंदिर में नवंबर-जनवरी के बीच वार्षिक मंडलम उत्सव के दौरान राजपरिवार का प्रमुख कुछ खास अनुष्ठान करने का विशेषाधिकार रखता है. राजा ने यहां प्रेस मीट में कहा, ‘पंडलाम राजपरिवार सबरीमला मंदिर के कुछ अधिकारों और परंपराओं का पालन करता है. जहां तक फैसले का सवाल है तो यह श्रद्धालुओं के विरुद्ध है. हम उसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय गए हैं. हम इस याचिका पर नतीजे का विश्लेषण करके उपयुक्त कदम उठाएंगे. Also Read - सीएए को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सबरीमला प्रकरण के बाद न्यायालय करेगा सुनवाई

भगवान अय्यप्पा के 5,000 से ज्यादा श्रद्धालुओं ने सबरीमला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को पूजा करने की मंजूरी देने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में शुक्रवार को यहां एक जुलूस निकाला. इन श्रद्धालुओं में ज्यादातर महिलाएं थीं. उन्होंने फैसले के खिलाफ तख्तियां लहरायीं और नारेबाजी करते हुए इसे संस्कृति एवं परंपरा के खिलाफ बताया. कोयंबटूर श्री अय्यप्पा सेवा संगम ने जुलूस का आयोजन किया था. बाद में श्रद्धालु बीच सड़क पर बैठ गए और थोड़ी देर भजन गाएं.

महिला श्रद्धालु मंदिर की पुरानी परंपरा के ही पालन करने पर तुली हुई हैं. चेन्नई के वेल्लुवर कोट्टम में भगवान अय्यप्पा की महिला भक्तों ने शुक्रवार को मंदिर की परंपरा का पालन करने की शपथ ली. सबरीमला अय्यप्पा सेवा समाजम के तत्त्वाधान में महिला श्रद्धालुओं ने यहां वल्लुवर कोट्टम में ‘चेंदा मेलम’ के साथ एक पूजा समारोह के बाद यह शपथ ली. श्रद्धालु बैनर और पोस्टर लिये हुये थे, जिन पर लिखा था- ‘‘परंपरा बचाओ’’ और भगवान अय्यप्पा एक ‘‘ ब्रह्मचारी’’ थे और इसलिए यह परंपरा बन गयी कि मासिक धर्म की अवधि वाली उम्र को पार करने के बाद ही महिलाएं मंदिर में जा सकेंगी.