सबरीमाला मंदिर के कपाट बंद, विरोध के बीच महिलाएं नहीं बदल पाईं परंपरा, भविष्य पर SC में फैसला आज

हर आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने के अपने ही फैसले पर फिर से विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

Published: October 23, 2018, 7:04 AM IST

नई दिल्ली: 10 से 50 साल तक की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पहली बार खोले गए सबरीमाला मंदिर के कपाट छह दिन बाद सोमवार रात में बंद कर दिए गए. हालांकि मंदिर के गर्भगृह तक 10 से 50 साल तक की महिलाओं को मंदिर में दर्शन करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कराया जा सका. 10 से 50 साल की आयु वर्ग में कार्यकर्ताओं और पत्रकारों सहित करीब एक दर्जन महिलाओं ने इतिहास रचने का बहादुरीपूर्ण प्रयास किया लेकिन भगवान अयप्पा के श्रद्धालुओं के विरोध के चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा.

सबरीमाला मंदिर में ‘दर्शन’ के आखिरी दिन, सोमवार को ‘रजस्वला’ आयुवर्ग की एक और महिला ने मंदिर में प्रवेश का प्रयास किया लेकिन प्रदर्शनकारियों के विरोध के चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा. अधिकारियों ने कहा कि दलित कार्यकर्ता बिंदू पहाड़ी पर स्थित सबरीमाला मंदिर के निचले हिस्से में स्थित पम्बा की ओर बढ़ रही थी. पम्बा से ही श्रद्धालु मंदिर के लिए पांच किलोमीटर की चढ़ाई शुरू करते हैं.

दलित कार्यकर्ता को उनके अनुरोध पर पुलिस संरक्षण प्रदान किया गया. बिंदू केरल राज्य परिवहन निगम की बस में पुलिसकर्मियों के साथ सफर कर रही थीं. बस जब पम्बा पहुंचने वाली थी, “नैश्तिक ब्रह्मचारी” के मंदिर में 10 से 50 साल की आयु वर्ग की लड़कियों एवं महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे श्रद्धालुओं और भाजपा कार्यकर्ताओं के एक समूह ने सड़क बाधित कर दिया और उन्हें बस से उतरने के लिए बाध्य कर दिया.

अधिकारियों ने कहा कि बिंदू को पुलिस की जीप में सुरक्षा में ले जाया गया. ‘मेलसंति’ या मुख्य पुजारी और अन्य पुजारी भगवान अयप्पा की प्रतिमा के दोनों तरफ खड़े थे और ‘हरिवर्षनम’ का गायन किया और कार्यक्रम के बीच में पूजा स्थल के दीपों को बुझाना शुरू कर दिया. गायन के अंतिम पंक्ति के साथ ही कपाट को बंद कर दिया गया.

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह केरल के सबरीमाला मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले उसके फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की तारीख पर मंगलवार को निर्णय करेगा. पीठ ने कहा, ‘हम जानते हैं कि 19 पुनर्विचार याचिकाएं लंबित हैं. हम मंगलवार तक फैसला करेंगे.’ दूसरी ओर मंदिर का प्रबंधन करने वाले बोर्ड ने सोमवार को कहा कि श्रद्धालुओं के विश्वास और मंदिर की परंपराओं की रक्षा करने की जिम्मेदारी उसकी है और वह मंगलवार को इस पर फैसला करेगा कि सुप्रीम कोर्ट में उसे क्या रुख अपनाना है.

बोर्ड के प्रमुख ए पद्मकुमार ने कहा कि त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड की मंगलवार को यहां बैठक होगी और तय किया जाएगा उच्चतम न्यायालय में उसका कानूनी रुख क्या होगा. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘श्रद्धालुओं के हितों की रक्षा करना टीडीबी की नैतिक जिम्मेदारी है. हमें मंदिर की रीतियों और परंपराओं को भी देखना होगा. बोर्ड इन्हें नुकसान पहुंचाए बिना उच्चतम न्यायालय में अपनी बात रखेगा.’ उनकी इस टिप्पणी का इसलिये महत्व है क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह कल यह तय करेगा कि उन याचिकाओं को सुनवाई के लिये कब सूचीबद्ध किया जाए जिनमें सबरीमला पर उसके हाल के फैसले की समीक्षा का अनुरोध किया गया है.

Add India.com as a Preferred Source Add India.com as a Preferred Source

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.