तेलंगाना में समय से पहले विधानसभा भंग करवाकर चुनाव कराने का कार्यवाहक मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव का दांव उलटा पड़ता दिख रहा है. कद्दावर नेता और सांसद के विश्वेश्वर रेड्डी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के चेवाला से सांसद रेड्डी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. इसी माह की 23 तारीख को तेलंगाना में कांग्रेस की वरिष्ठत्म नेता सोनिया गांधी की रैली होने वाली है. इस रैली में ही में रेड्डी के कांग्रेस में शामिल होने की संभावना है.

सात दिसंबर को राज्य में होने वाले मतदान से पहले इसे सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति को बड़ा झटका माना जा रहा है. विश्वेश्वर रेड्डी राज्य की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने वाले रेड्डी समुदाय से हैं. जानकारों का कहना है कि रेड्डी अपने इलाके के प्रभावी नेता हैं और वह कुछ विधानसभा सीटों पर नतीजों को बदलने की क्षमता रखते हैं.

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पेशे से इंजीनियर रहे रेड्डी 2013 में तेलंगाना राष्ट्र समिति में शामिल हुए थे. उनके दादा कोंडा कोंडा वेंकट रंगा रेड्डी एक स्वतंत्रता सेनानी थे. बाद में वह आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बने थे. कहा जाता है कि उन्हीं के नाम पर रंगा रेड्डी जिले का नाम पड़ा है.

एनडीटीवी की खबर के मुताबिक रेड्डी पार्टी में महत्व नहीं मिलने से नाराज चल रहे थे. तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख और मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव को लिखे तीन पेज के एक पत्र में उन्होंने विचारधारा को पार्टी छोड़ने का कारण बताया है.

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इस बीच ऐसी भी रिपोर्ट आई कि प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रेवंत रेड्डी ने मुख्यमंत्री केसीआर को चुनौती दी थी कि वह अगर हो सके तो विश्वेश्वर रेड्डी को पार्टी छोड़ने से रोककर दिखाएं. ऐसे भी कयास लगाए जा रहे हैं कि टीआरएस के एक और नेता और सांसद सीताराम नाइक भी पार्टी छोड़ सकते हैं. नाइक महबूबाबाद लोकसभा सीट से सांसद हैं. तलंगाना की 117 सदस्यीय विधानसभा में इस समय टीआरएस के 63 सदस्य हैं. कांग्रेस के 22 और भाजपा के नौ विधायक हैं.