नई दिल्ली: कर्नाटक में सियासी नाटक लगातार जारी है, मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब बी. एस. येदियुरप्पा के सामने चुनौती है विधानसभा में बहुमत साबित करने की. शनिवार को होने वाले फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करने के लिए बीजेपी जी जान से जुटी हुई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार शनिवार को कर्नाटक विधानसभा में शक्ति परीक्षण की पूरी कार्यवाही को प्रोटेम स्पीकर को ही अंजाम देना है. ऐसे में यह पद इस वक्त अहम हो गया है. चुनाव में जीती हुई सीटों के हिसाब से सदन में बहुमत साबित करना बीजेपी के लिए मुश्किल होगा ऐसे में विधानसभा के स्पीकर की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है कि वो किसी भी स्थिति से कैसे निपटते हैं. फ्लोर टेस्ट वाले दिन स्पीकर के महत्व को देखते हुए ही कांग्रेस ने बीजेपी पर प्रोटेम स्पीकर के चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया है. Also Read - भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा कोविड-19 के लक्षणों के बाद अस्पताल में भर्ती

कांग्रेस का आरोप क्या है?
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी जोड़-तोड़ करके बहुमत साबित करना चाहती है. परंपरा के मुताबिक सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाता है और राज्यपाल उन्हें शपथ दिलाते हैं. उसके बाद प्रोटेम स्पीकर अन्य सदस्यों को सदन की सदस्यता की शपथ दिलाते हैं. लेकिन इस बार राज्यपाल ने केजी बोपैय्या को प्रोटेम स्पीकर बनाया हैं, आरोप यह है कि बोपैय्या सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य नहीं है. Also Read - भाजपा हिमाचल स्वास्थ्य विभाग में 'भ्रष्टाचार के पाप' से छुटकारा नहीं पा सकती : कांग्रेस

कांग्रेस का कहना है कि उनके विधायक आरवी देशपांडे सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं. उन्होंने 1982 से नौ बार विधानसभा का चुनाव लड़ा है जिसमें से आठ बार वह विजयी रहे हैं. इसके बाद दूसरे सबसे वरिष्ठ सदस्य भाजपा के उमेश विश्वनाथ कट्टी हैं जो सात बार के विधायक हैं. लेकिन इन दोनों में किसी को प्रोटेम स्पीकर नहीं बनाया गया.

बीजेपी का कांग्रेस को जवाब
वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के आरोप को निराधार बताया है. बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कांग्रेस के आरोप पर कहा, ”केजी बोपैय्या को 2008 में भी राज्यपाल ने प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया था, उस समय बोपैय्या आज के हिसाब से 10 साल छोटे थे इसलिए कांग्रेस बेवजह का आरोप लगा रही है, बोपैय्या जी की प्रोटेम स्पीकर के तौर पर नियुक्ति नियमों के हिसाब से हुई है.”