पुरी: नेपाल के अंतिम राजा ज्ञानेंद्र बीर बिक्रम शाह देव ने कहा है कि कानूनी अड़चनों के कारण उनके देश के लिए पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर को कस्तूरी की आपूर्ति करना संभव नहीं है. शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के पट्टाभिषेक की रजत जयंती के मौके पर गुरुवार को बिक्रम शाह देव ने कहा कि कस्तूरी लुप्तप्राय कस्तूरी हिरण की ग्रंथि से प्राप्त होती है और इस पशु को मारना अब गैर कानूनी है. Also Read - चीन ने कई जगहों पर नेपाल की जमीन पर अवैध कब्जा किया, भारतीय खुफिया एजेंसियां सतर्क

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि नेपाल कस्तूरी की आपूर्ति कर पाएगा क्योंकि कानून में कस्तूरी हिरण से इसे निकालने की मंजूरी नहीं है.’रिवाजों के अनुसार, 12वीं सदी के इस मंदिर में देवी देवताओं की प्रतिमा पर हर साल कम से कम तीन मौकों पर कस्तूरी लगाई जाती है, ताकि उन्हें कीटों और नुकसान से बचाया जा सके. मंदिर को देव के शासन के दौरान नेपाल से कीमती कस्तूरी मिल रही थी लेकिन वर्ष 2008 के बाद से इसकी आपूर्ति में कमी आ गई है. Also Read - RAW प्रमुख से मिले नेपाल के प्रधामनंत्री केपी शर्मा ओली, शुरू हुआ 'विवाद'

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इससे पहले अप्रैल 2017 में मंदिर प्रशासन ने नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के मंदिर दौरे के दौरान कस्तूरी की कमी के बारे में बताया था. राज्य सरकार ने विदेश मंत्रालय से इस मामले को नेपाल के समक्ष उठाने का अनुरोध भी किया था. बीर बिक्रम शाह देव का 11 फरवरी को श्री जगन्नाथ मंदिर का दौरा करने का कार्यक्रम है। Also Read - होटल में 3 दिन तक हुआ रेप, नेपाली लड़की यूपी पुलिस पर भरोसा न कर भागकर पहुंची महाराष्ट्र फिर...