Kisan Andolan: नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन (Farmers Protest) लगातार जारी है. सरकार और किसान संगठनों के बीच बुधवार को 10वें दौर की बातचीत भी बेनतीजा खत्म हो गई. बैठक के दौरान सरकार ने एक साल तक कानून निलंबन का प्रस्ताव दिया था, जिसे किसान संगठनों ने नामंजूर कर दिया. इसके अलावा केंद्र सरकार की तरफ से नई कमेटी के गठन का प्रस्ताव भी किसानों ने ठुकरा दिया. Also Read - राहुल गांधी ने अनुराग कश्‍यप और तापसी पन्‍नू पर IT Raid को लेकर सरकार पर कसा तंज

उधर, किसानों की 26 जनवरी को होने वाली ट्रैक्टर रैली को लेकर दिल्ली पुलिस की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि रैली को लेकर फैसला दिल्ली पुलिस ही करे.

वहीं, इससे पहले किसान नेता राकेश टिकैत ने भी यह साफ कर दिया था कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मान लेती आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने गणतंत्र दिवस को लेकर भी कहा था कि इस बार यह ऐतिहासिक होगा. एक तरफ जवान परेड कर रहे होंगे और दूसरी तरफ किसान प्रदर्शन.

बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल, वाणिज्य और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल तथा केंद्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री सोमप्रकाश लगभग 40 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ यहां विज्ञान भवन में वार्ता में शामिल हुए. 10वें दौर की वार्ता 19 जनवरी को होनी थी, लेकिन यह स्थगित कर दी गई थी. केंद्र सरकार और प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच नौ दौर की वार्ता में मुद्दे को सुलझाने की कोशिश बेनतीजा रही थी.

सरकार ने पिछली वार्ता में किसान संगठनों से अनौपचारिक समूह बनाकर अपनी मांगों के बारे में सरकार को एक मसौदा प्रस्तुत करने को कहा था. हालांकि किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े रहे. उल्लेखनीय है कि सरकार और किसान संगठनों के मध्य चल रही वार्ता के बीच सुप्रीम कोर्ट ने 11 जनवरी को गतिरोध समाप्त करने के मकसद से चार सदस्यीय समिति का गठन किया था, लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों ने नियुक्त सदस्यों द्वारा पूर्व में कृषि कानूनों को लेकर रखी गई राय पर सवाल उठाए. इसके बाद एक सदस्य भूपिंदर सिंह मान ने खुद को इस समिति से अलग कर लिया.

उच्चतम न्यायालय ने नये कृषि कानूनों पर गतिरोध खत्म करने के लिए गठित की गई समिति के सदस्यों पर कुछ किसान संगठनों द्वारा आक्षेप लगाए जाने को लेकर बुधवार को नाराजगी जाहिर की. साथ ही, शीर्ष न्यायालय ने यह भी कहा कि उसने समिति को फैसला सुनाने का कोई अधिकार नहीं दिया है, यह शिकायतें सुनेगी तथा सिर्फ रिपोर्ट देगी.

इस बीच, राष्ट्रीय राजधानी में गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रदर्शनकारी किसानों की प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली को रोकने के लिए एक न्यायिक आदेश पाने की दिल्ली पुलिस की उम्मीदों पर पानी फिर गया. दरअसल, शीर्ष न्यायालय ने केंद्र को (इस संबंध में दायर) याचिका वापस लेने का निर्देश देते हुए कहा कि यह ‘पुलिस का विषय’ है और ऐसा मुद्दा नहीं है कि जिस पर न्यायालय को आदेश जारी करना पड़े.

(इनपुट: एजेंसी)