नई दिल्ली: किसान नेता चौधरी हरपाल सिंह बेलरी ने कहा कि सरकार ने पराली और बिजली से जुड़ी दो मांगें मान ली हैं. सरकार इन दोनों से जुड़े प्रावधान वापस लेने को सहमत हो गई है. बाकी दो मांगें- कृषि कानून निरस्त करने और एमएसपी पर गारंटी पर 4 जनवरी को चर्चा होगी. आज की बैठक में जिन चार मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें दो मुद्दों का हल निकल गया है. Also Read - Kisan Andolan: 26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च निकालने पर अडिग किसान यूनियन, आज सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय

जिन 4 मुख्य मुद्दों पर बातचीत चली, वे हैं- 1. तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किया जाए. 2. एमएसपी को कानूनी जामा पहनाएं और 3. एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए बने कानून के तहत कार्रवाई के दायरे से किसानों को बाहर रखा जाए. 4. विद्युत संशोधन विधेयक 2020 के मसौदे को वापस लिया जाए. Also Read - Farmers Protest: पंजाब के मंत्री का बड़ा आरोप, 'एनआईए ने किसान आंदोलन के समर्थकों को नोटिस भेजा'

किसान और केंद्र सरकार के बीच छठे दौर की बातचीत खत्म होने के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार और किसानों के बीच बातचीत अच्छे वातारण में हुई और हमारे बीच दो मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और जिन दो मुद्दों पर सहमति नहीं बनी है उनमें अगले दौर को 4 जनवरी को चर्चा होगी. Also Read - कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने फिर की अपील, 'कानून निरस्त करने के अलावा विकल्प बताएं किसान यूनियन'

तोमर ने किसान संगठनों से वार्ता के बाद यह दावा किया. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की किसान संगठनों की मांग एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने का मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बन सकी. उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर चार जनवरी को फिर चर्चा होगी.

छठे दौर की इस वार्ता में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और तोमर के अलावा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्यमंत्री सोम प्रकाश शामिल हुए. तोमर ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि किसान संगठनों के साथ वार्ता ‘‘सौहार्द्रपूर्ण वातावरण’’ में संपन्न हुई.

उन्होंने कहा, ‘‘आज की बैठक में किसान यूनियन के नेताओं ने जो चार विषय चर्चा के लिए रखे थे, उनमें दो विषयों पर आपसी रजामंदी सरकार और यूनियन के बीच में हो गई है. पहला पराली जलाने से संबंधित कानून है. इस मुद्दे पर दोनों पक्षों में रजामंदी हो गई है.’’

उन्होंने कहा कि बिजली संशोधन विधेयक, जो अभी अस्तित्व में नहीं आया है, को लेकर किसानों को आशंका है कि इससे उन्हें नुकसान होगा. उन्होंने कहा, ‘‘इस मांग पर भी दोनों पक्षों के बीच सहमति हो गई है. यानी 50 प्रतिशत मुद्दों पर सहमति हो गई है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘वार्ता बहुत ही सुखद वातावरण में संपन्न हुई. इससे दोनों पक्ष में अच्छे प्रकार के माहौल का निर्माण हुआ.’’

तोमर ने तीनों कानूनों को रद्द करने की किसान संगठनों की मांग पर कहा कि जहां-जहां किसानों को कठिनाई है वहां सरकार ‘‘खुले मन’’ से चर्चा को तैयार है. उन्होंने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा दिए जाने की किसान संगठनों की मांग पर कोई सहमति नहीं हो सकी.

उन्होंने कहा, ‘‘कानून और एमएसपी के विषय में चर्चा अभी पूर्ण नहीं हुई है. चर्चा जारी है. हम चार जनवरी को दो बजे फिर से मिलेंगे और इन विषयों पर चर्चा को आगे बढ़ाएंगे.’’ केंद्र ने सोमवार को आंदोलन कर रहे 40 किसान संगठनों को सभी प्रासंगिक मुद्दों का ‘तार्किक हल’’ खोजने के लिए आज अगले दौर की बातचीत के लिए आमंत्रित किया था.

सरकार और किसान संगठनों में पिछले दौर की वार्ता पांच दिसंबर को हुई थी. छठे दौर की वार्ता नौ दिसंबर को होनी थी, लेकिन इससे पहले गृह मंत्री शाह और किसान संगठनों के कुछ नेताओं के बीच अनौपचारिक बैठक में कोई सफलता न मिलने पर इसे रद्द कर दिया गया था.