Kisan Andolan: गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहली बार बयान दिया है. दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसानों के 26 जनवरी को ट्रैक्‍टर परेड के दौरान लाल किले पर उपद्रव हुआ था. इसको लेकर अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि इस मामले में दिल्‍ली पुलिस ने बेहद संयम का परिचय दिया.Also Read - UP Election 2022: अमित शाह ने कैराना से शुरू किया प्रचार, पलायन के मुद्दे का ज़िक्र कर BJP के लिए मांगे वोट

गृह मंत्री ने कहा, “हम नहीं चाहते थे कि किसानों का आंदोलन रक्‍तरंजित हो. हमारी किसान नेताओं से ट्रैक्‍टर परेड को लेकर पूरी चर्चा हुई थी पर उन्‍होंने वादा तोड़ा.” अमित शाह पश्चिम बंगाल के दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने इंडिया टुडे कॉन्‍क्‍लेव में शिरकत की. जब उनसे पूछा गया कि लाल किले पर उपद्रवी कैसे चढ़ गए? तो उन्‍होंने कहा कि दिल्‍ली पुलिस ने काफी संयम बरता और उपद्रव करने वालों पर गोलियां नहीं चलाईं. लाठीचार्ज वगैरह करके उन्‍हें नियंत्रित किया गया और ढाई घंटे के भीतर पूरी दिल्‍ली को खाली करा लिया गया. Also Read - अमित शाह ने 'जिला सुशासन सूचकांक' लॉन्च किया, कहा- जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव जल्द होंगे, राज्य का दर्जा बहाल करेंगे

शाह ने कहा कि हर कोई कह रहा है कि जो लोग लाल किले पर चढ़े थे वे किसान नहीं हो सकते. बता दें कि 26 जनवरी को नई दिल्‍ली में गणतंत्र दिवस परेड के बाद किसानों की ट्रैक्‍टर रैली निकली थी. इस दौरान लाल किले समेत कई जगहों पर उपद्रव हुए थे. इस हिंसा में दिल्‍ली पुलिस के सैकड़ों जवान घायल हो गए थे. Also Read - मुस्लिम महिलाओं के प्रति अश्लील टिप्पणी का केस: Club House पर बिसमिल्लाह नाम से प्रोफाइल बनाए था आरोपी, पकड़ा गया

कोविड-19 टीकाकरण समाप्त होने के बाद सीएए को लागू किया जाएगा: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में मातुआ समुदाय सहित सीएए के तहत शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया एक बार कोविड-19 का टीकाकरण समाप्त होने के बाद शुरू हो जाएगी. उन्होंने विपक्ष पर अल्पसंख्यक समुदाय को संशोधित नागरिकता कानून पर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसे लागू किए जाने से भारतीय अल्पसंख्यकों की नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने 2018 में वादा किया था कि वह नया नागरिकता कानून लाएगी और 2019 में भाजपा के सत्ता में आते ही वादे को पूरा किया गया. उन्होंने कहा कि 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका.

उन्होंने कहा, ‘‘ममता दीदी ने कहा कि हमने गलत वादा किया. उन्होंने सीएए का विरोध करना शुरू कर दिया और कहती हैं कि वह इसे कभी लागू नहीं होने देंगी. भाजपा अपने वादे हमेशा पूरे करती है. हम इस कानून को लेकर आए हैं और शरणार्थियों को नागरिकता मिलेगी.’’

उन्होंने मातुआ समुदाय के गढ़ में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘जैसे ही कोविड-19 के टीकाकरण की प्रक्रिया खत्म होती है सीएए के तहत नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.’’

मातुआ मूल रूप से पूर्वी पाकिस्तान के कमजोर तबके के हिंदू हैं जो बंटवारे के बाद और बांग्लादेश के निर्माण के बाद भारत आ गए थे. उनमें से कई को भारतीय नागरिकता मिल गई है लेकिन बड़ी आबादी को अभी तक नागरिकता नहीं मिली है. शाह ने कहा कि बनर्जी सीएए को लागू करने का विरोध करने की स्थिति में नहीं होंगी क्योंकि विधानसभा चुनावों के बाद वह मुख्यमंत्री नहीं होंगी.

(इनपुट भाषा)