नई दिल्ली: कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान किया है. इसके अलावा किसानों ने कहा है कि अगर 5 दिसंबर तक कानून वापस नहीं लिए गए तो दिल्ली के और रोड भी ब्लॉक किए जाएंगे. Also Read - Tractor Rally: पेट्रोल पंप बंद करने की झूठी खबर फैलाने वालों पर कार्रवाई करेगी पंजाब पुलिस

सिंघु बॉर्डर से भारतीय किसान यूनियन के जनरल सेक्रेटरी हरविंदर सिंह लखवाल ने कहा, “5 दिसंबर को मोदी सरकार और कॉर्पोरेट घरानों के पुतले पूरे देश में फूंके जाएंगे. 7 तारीख को सभी वीर अपने मेडलों को वापिस करेंगे. 8 तारीख को हमने भारत बंद का आह्वान किया है व एक दिन के लिए सभी टोल प्लाज़ा फ्री कर दिए जाएंगे.” Also Read - Kisan Andolan: कब खत्म होगा किसानों का आंदोलन? कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दिया यह जवाब...

किसान नेता हरविंदर सिंह लखवाल ने एक बैठक के बाद कहा, “आठ दिसंबर को भारत बंद का आह्वान करने का फैसला लिया गया है. हमने दिल्ली की शेष सड़कों को अवरूद्ध करने की योजना बनाई है.” Also Read - कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए मुंबई को निकले महाराष्ट्र के हजारों किसान, आजाद मैदान में करेंगे रैली

‘संशोधन स्वीकार नहीं करेंगे’

सिंघु बॉर्डर से ही अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा, “इसे सिर्फ पंजाब आंदोलन बोलना सरकार की साजिश है मगर आज किसानों ने दिखाया कि ये आंदोलन पूरे भारत में हो रहा है और आगे भी होगा. हमने फैसला लिया है कि अगर सरकार कल कोई संशोधन रखेगी तो हम संशोधन स्वीकार नहीं करेंगे.”

एक अन्य किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा, “यदि सरकार हमारी मांगों को कल बैठक में स्वीकार नहीं करती है, तो हम नये कृषि कानूनों के खिलाफ अपना आंदोलन तेज कर देंगे.”

संवाददाता सम्मेलन के दौरान राजस्थान, तेलंगाना, राजस्थान, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के किसान नेता भी मौजूद थे. किसान नेताओं ने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा कि इन नये कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए केन्द्र संसद का विशेष सत्र बुलाये. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी नये कानूनों में संशोधन नहीं चाहते हैं बल्कि वे चाहते हैं कि इन कानूनों को निरस्त किया जाये.

राजस्थान से किसान नेता रणजीत सिंह राजू ने कहा कि चल रहा आंदोलन देश के सभी किसानों से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि यदि इस मुद्दे पर लोगों की भावनाओं को नहीं समझा जाता है या इसके कारण कुछ भी घटित होता है तो इसके लिए पूरी तरह से सरकार जिम्मेदार होगी.

किसानों की चिंता

दिल्ली के बॉर्डर बिंदुओं पर पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों के किसानों का प्रदर्शन लगातार नौ दिनों से जारी है. किसान नेताओं और सरकार के बीच बृहस्पतिवार को हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका था. प्रदर्शनकारी किसानों को आशंका है कि केन्द्र सरकार के कृषि संबंधी कानूनों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था समाप्त हो जायेगी और किसानों को बड़े औद्योगिक घरानों की ‘‘अनुकंपा’’ पर छोड़ दिया जायेगा. सरकार लगातार कह रही है कि नए कानून किसानों को बेहतर अवसर प्रदान करेंगे और इनसे कृषि में नई तकनीकों की शुरूआत होगी.

किसानों और सरकार के बीच शनिवार को पांचवें दौर की बातचीत होनी है.

लिंक रोड बंद

कृषि कानूनों के विरोध में किसान हरियाणा और उत्तर प्रदेश से लगती दिल्ली की कई सीमाओं पर पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से डेरा डाले हुए हैं. तभी से दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ट्विटर हैंडल के माध्यम से यात्रियों की सुविधा के लिए रोड ब्लॉक्स और रूट डायवर्जन पर नियमित अपडेट पोस्ट कर रही है.

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने शुक्रवार देर रात ट्वीट कर कहा कि गौतम बुद्ध द्वार के पास किसानों के विरोध के कारण नोएडा लिंक रोड पर नोएडा की सीमा नोएडा से दिल्ली तक यातायात के लिए बंद है. लोगों को दिल्ली आने के लिए नोएडा लिंक रोड से बचने और DND का उपयोग करने की सलाह दी जाती है.