Kisan Andolan Latest Updates:  तीनों कृषि कानूनों (Farm Laws) को वापस लिये जाने के बाद भी किसानों का आंदोलन (Farmers Protest) जारी है. हालांकि जल्द ही किसान अपना आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर सकते हैं. कृषि से जुड़ी मांगों को लेकर किसानों के आंदोलन के अगले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. SKM की सिंधु बॉर्डर पर हुई बैठक के दौरान सरकार द्वारा प्राप्त हुए प्रस्ताव पर किसानों ने कुछ ऐतराज दर्ज कराया है, जिसपर सरकार से बुधवार तक स्पष्टीकरण भी मांगा गया है. दरअसल सरकार द्वारा किसान संगठनों को जवाब दिया गया है उसपर अधिकतर किसानों की मांगों को मान लिया गया है. वहीं किसानों ने सरकार के प्रस्ताव पर विचार विमर्श किया और कुछ किसानों ने इसपर ऐतराज जताया है. संयुक्त किसान मोर्चा बुधवार दोपहर 2 बजे बैठक करेगा और सरकार से स्पष्टीकरण प्राप्त करने के बाद ही आंदोलन पर कुछ फैसला लिया जाएगा.Also Read - IAS Cadre Rules: आईएएस कैडर के नियमों में बदलाव करने जा रही केंद्र सरकार, जानें क्या होंगे नए नियम?

क्या है किसानों की मांग

  • सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा को पांच प्वाइंटों के साथ एक प्रस्ताव भेजा, जिसमें कहा गया है कि, MSP पर प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं और बाद में कृषि मंत्री ने एक कमेटी बनाने की घोषणा की है.
  • इस कमेटी में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और किसान संगठनों के प्रतिनिधि और कृषि वैज्ञानिक सम्मिलत होंगे. हम इसमें स्पष्ट करना चाहते हैं कि किसान प्रतिनिधि में SKM के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. किसानों ने इसपर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है.
  • किसानों के मुताबिक, किसान संगठनों के प्रतिनिधियों में कौन होगा? किसानों के अनुसार, इसमें जो हमेशा आंदोलन का विरोध करते रहे हैं, सरकार उनको भी शामिल कर सकती है.
  • इसके अलावा सरकार ने प्रस्ताव में कहा है कि, जहां तक किसानों को आंदोलन के वक्त के केसों का सवाल है उत्तर प्रदेश सरकार और हरियाणा सरकार ने इसके लिए पूर्णतया सहमति दी है कि आंदोलन वापस खींचने के बाद तत्काल ही केस वापस लिए जाएंगे.
  • किसानों ने आंदोलन वापस खींचने के बाद तत्काल ही केस वापस लिए जाएंगे वाली शर्त पर ऐतराज जताते हुए कहा है कि, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों में भी मुकदमे दर्ज हैं. वहीं रेल रोको के वक्त भी मुकदमे दर्ज हुए थे. अकेले हरियाणा में ही 48 हजार किसानों पर मुकदमे दर्ज हैं. इनको वापस लेने की शुरुआत तुरंत होनी चाहिए.
  • सरकार ने किसानों को अपने प्रस्ताव में आगे कहा है कि, किसान आंदोलन के दौरान भारत सरकार के संबंधित विभाग और संघ प्रदेश क्षेत्र के आंदोलन के केस पर भी आंदोलन वापस लेने के बाद केस वापस लेने की सहमति बनी है. मुआवजे का जहां तक सवाल है, इसके लिए भी हरियाणा और उत्तरप्रदेश सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है.
  • इसके अलावा सरकार के प्रस्ताव पर आगे कहा गया है कि जहां तक पराली के मुद्दे का सवाल है, भारत सरकार ने जो कानून पारित किया है उसकी धारा 14 एवं 15 में क्रिमिलन लाइबिलिटी से किसान को मुक्ति दी है.
  • किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार द्वारा प्रस्ताव दिया गया था कि सारी बातें मान ली जाएंगी आप उठ जाइए. MSP पर कमेटी बनाएंगे. परंतु कुछ स्पष्ट नहीं है. कल 2 बजे फिर से चर्चा होगी. केस वापसी को लेकर प्रस्ताव है कि केस वापस ले लिए जाएंगे, आप उठ जाइए. लेकिन चिट्ठी पर कौन विश्वास करेगा?
  • संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि कानून के वापस लिए जाने के बाद एमएसपी की कानूनी गारंटी, बिजली संशोधन बिल की वापसी, वायु प्रदूषण बिल से किसानों के जुर्माने की धारा को हटाना, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की गिरफ्तारी और बर्खास्तगी, किसानों पर लगाए गए फर्जी मुकदमों की वापसी और शहीद परिवारों का पुनर्वास के साथ शहीद स्मारक मुद्दे को उठाया था. (इनपुट: एजेंसी)
Also Read - IAS Cadre Rules में बदलाव करने जा रही मोदी सरकार, जानें इससे क्या फर्क पड़ेगा, जिसका विरोध हो रहा है

Also Read - Netaji Subhash Chandra Bose की 125वीं जयंती : राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि, ममता ने कहा- राष्ट्रीय अवकाश घोषित करें