Kisan Andolan Latest Updates: किसान आंदोलन को आज 31वां दिन है. किसान कृषि कानूनों (Farm Laws) को वापस लिए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं. किसानों का कहना है कि वह इससे कम में नहीं मानेंगे. वहीं, किसान अब एक बार फिर बातचीत के लिए तैयार हो गए हैं. किसानों ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजते हुए 29 दिसंबर को वार्ता करने की बात कही है. Also Read - खेती को बर्बाद करने बनाए गए तीन कानून... मेरा चरित्र साफ, मैं डरने वाला नहीं: राहुल गांधी

इस दौरान स्वाराज्य इंडिया के योगेंद्र यादव (Yogendra Yadav) ने कहा, “हम संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से सभी संगठनों से बातचीत कर ये प्रस्ताव रख रहे हैं कि किसानों के प्रतिनिधियों और भारत सरकार के बीच अगली बैठक 29 दिसंबर 2020 को सुबह 11 बजे आयोजित की जाए. भारतीय किसान यूनियन (Bhartiya Kisan Union) के वरिष्ठ नेता टिकैत ने हालांकि कहा कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए तौर-तरीके और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए गारंटी का मुद्दा सरकार के साथ बातचीत के एजेंडे में शामिल होना चाहिए. Also Read - राहुल गांधी ने कृषि कानूनों के खिलाफ 'खेती का खून' नाम की बुकलेट जारी की, कहा- मैं PM Modi और बीजेपी से नहीं डरता

ये चार मांगें रखेंगे
किसानों द्वारा बैठक का एजेंडा भी तय कर लिया गया है. इस एजेंडे के अनुसार 4 बिंदुओं को किसानों ने रखा है जिसमें पहला, तीनों कृषि कानूनों को रद्द/निरस्त करने के लिए अपनाए जाने वाली क्रियाविधि. वहीं दूसरा सभी किसानों और कृषि वस्तुओं के लिए राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा सुझाए लाभदायक एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी देने की प्रक्रिया और प्रावधान हों. Also Read - क्या Farmers Protest में हो रही विदेशी फंडिंग? इन अलगाववादी संगठनों पर एजेंसियों की नजर

तीसरा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अध्यादेश, 2020 में ऐसे संशोधन जो अध्यादेश के दंड प्रावधानों से किसानों को बाहर करने के लिए जरूरी हैं. चौथा किसानों के हितों की रक्षा के लिए ‘विद्युत संशोधन विधेयक 2020’ के मसौदे में जरूरी बदलाव.

TMC को किसानों के लिए समर्थन
इस बीच तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि कृषक समुदाय के प्रति नरेंद्र मोदी सरकार की नीति के खिलाफ पार्टी के डिजिटल मीडिया अभियान को ट्विटर पर भारी समर्थन मिला है. तृणमूल कांग्रेस ने एक बयान में कहा कि ‘हैशटैग किसानों के खिलाफ मोदी’ चलाकर पार्टी का उद्देश्य देश के ‘ किसानों के खिलाफ बढ़ते अपराधों’ को उजागर करना है.

बयान में कहा गया,”फिलहाल यह हैशटैग भारत में नंबर तीन पर ट्रेंड कर रहा हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के किसान ऐसी सरकार देख रहे हैं जो वास्तव में किसान विरोधी है.’’ तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि पार्टी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के पास विरोध कर रहे किसानों से बात की और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी पार्टी उनके साथ खड़ी है. पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल ने आंदोलनरत किसानों से बातचीत के लिए भी पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भेजा था.