Kisan Andolan: कृषि कानूनों (Farm Laws 2020) को लेकर Tweet करने पर पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन की दिशा में काम करने वाली ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) के खिलाफ दिल्ली पुलिस FIR दर्ज की है. दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने ग्रेटा के खिलाफ धारा 153A और 120B के तहत मामला दर्ज किया है. FIR दर्ज होने के बाद भी ग्रेटा ने एक और ट्वीट कर कहा कि वह ‘अब भी किासनों के साथ हैं.’Also Read - मुस्लिम महिलाओं के प्रति अश्लील टिप्पणी का केस: Club House पर बिसमिल्लाह नाम से प्रोफाइल बनाए था आरोपी, पकड़ा गया

ग्रेटा थनबर्ग ने ट्वीट कर लिखा, ‘मैं अब भी किसानों के समर्थन में खड़ी हूं और उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को समर्थन करती हूं. नफरत, धमकी या मानवाधिकारों का उल्‍लंघन इसे बदल नहीं सकेगा’ Also Read - शादी के कार्ड पर किसान आंदोलन की झलक, दूल्हे ने लिखवाया- जंग अभी जारी है, MSP की बारी है

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इससे पहले ग्रेटा थनबर्ग ने ट्वीट कर कहा था, ‘हम भारत में किसानों के आंदोलन के प्रति एकजुट हैं.’

बता दें कि थनबर्ग ने मंगलवार को ट्वीट किया था, ‘हम भारत में किसानों के आंदोलन के प्रति एकजुट हैं.’ इसके बाद थनबर्ग ने बुधवार को किए ट्वीट में कहा था, ‘जिन लोगों को मदद चाहिए उनके लिए टूलकिट (सॉफ्टवेयर) साझा किया है.’ यह टूलकिट उपयोगकर्ता को प्रदर्शन के समर्थन के तरीकों की विस्तृत जानकारी वाले दस्तावेज तक पहुंच उपलब्ध कराते हैं. इन दस्तावेजों में ट्विटर पर प्रतिक्रिया देना, भारतीय दूतावासों के सामने प्रदर्शन आदि शामिल है, जिसे किसानों के समर्थन में करने का आह्वान किया गया है.

बता दें कि इससे पहले अमेरिका की मशहूर पॉप गायिका रिहाना के साथ-साथ कई प्रमुख हस्तियां एवं कार्यकर्ता भी किसान आंदोलन के समर्थन में आ गए. इससे इस आंदोलन ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है. हालांकि, भारत ने उनकी टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह ‘ना तो सही हैं और ना ही जिम्मेदाराना है.’

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया अमेरिकी पॉप गायिका रिहाना और स्वीडन की जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग सहित कई मशहूर हस्तियों के भारत में किसानों के प्रदर्शन के बारे में की गई टिप्पणी के बाद आई थी. मंत्रालय ने कहा था कि प्रदर्शन के बारे में टिप्पणी करने से पहले तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए.

मंत्रालय ने कहा था कि कुछ निहित स्वार्थी समूह प्रदर्शनों पर अपना एजेंडा थोपने का प्रयास कर रहे हैं और संसद में पूरी चर्चा के बाद पारित कृषि सुधारों के बारे में देश के कुछ हिस्सों में किसानों के बहुत ही छोटे वर्ग को कुछ आपत्तियां हैं.