Kisan Andolan Updates: नया साल (New Year 2021) शुरू हो गया है और किसानों का आंदोलन (Farmeres Protest) का अब भी जारी है. हजारों की संख्या में किसान डटे हुए दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं. किसानों की सरकार से दो दिन पहले बातचीत में कुछ बिंदुओं पर सहमती ज़रूर बनी, लेकिन किसान अब अभी कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर डटे हुए हैं. किसानों का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानूनी गारंटी और नए कृषि कानूनों को रद्द करने का कोई विकल्प नहीं है.Also Read - अग्निपथ योजना पर बोले हनुमान बेनीवालः किसान आंदोलन में भी झुके थे अब फिर से पीएम मोदी को झुकना होगा

वरिष्ठ किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा (Sanyukt Kisan Morcha) ने आगे की कदम के बारे में चर्चा के लिए शुक्रवार को एक और बैठक बुलाई है. हालांकि, एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी और कृषि कानूनों को निरस्त करने वाले दो मुद्दों से पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है. Also Read - 'अडाणी ग्रुप जैसे लोग इतने मालदार कैसे हो रहे', सत्यपाल मलिक ने कसा मोदी सरकार पर तंज

सरकार और किसान संघों के बीच छठे दौर की वार्ता लगभग पांच घंटे चली जिसमें बिजली दरों में वृद्धि और पराली जलाने पर दंड को लेकर किसानों की चिंताओं को हल करने के लिए कुछ सहमति बनी. Also Read - देश के सभी राज्यों में होना चाहिए किसान आंदोलन, दिल्ली तक सीमित न रहे: योगेंद्र यादव

चढूनी ने कहा, “सरकार ने पराली जलाने से संबंधित अध्यादेश में किसानों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधानों को हटाने और बिजली कानून में प्रस्तावित संशोधन को रोकने की हमारी मांगों का निपटान कर दिया है.” उन्होंने कहा, ” लेकिन हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारी दो शेष मांगों का कोई विकल्प नहीं है, जिसमें तीन कृषि कानूनों को निरस्त करना और एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी शामिल है.”

प्रदर्शन कर रहे किसान संघों में शामिल ऑल इंडिया किसान संघर्ष को- ओर्डिनेशन कमेटी ने बृहस्पतिवार को एक बयान जारी कर कहा कि केंद्र सरकार ने किसान नेताओं से कानूनों को निरस्त करने का विकल्प सुझाने की अपील की है जो असंभव है. बयान में कहा गया है, ” नए कानून कृषि बाजारों, किसानों की जमीन और खाद्य श्रृंखला को कॉरपोरेट के हवाले कर देंगे.” बयान में कहा गया है कि जब तक ये कानून रद्द नहीं कर दिए जाते हैं, तब तक मंडियों में किसान समर्थक बदलाव करने और किसानों की आय को दोगुना करने पर चर्चा करने की कोई गुंजाइश नहीं है.