नई दिल्ली: गांधी जयंती पर मंगलवार को किसानों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई. दिल्ली में किसानों को एंट्री से रोकने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारें कीं, आंसू गैस के गोले छोड़े, लाठीचार्ज किया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने रबर की गोलियां भी चलाईं. इस दौरान कई किसान घायल हो गए. हालांकि दिल्ली पुलिस ने देर रात किसानों को दिल्ली में एंट्री की इजाजत दे दी. इसके साथ ही पुलिस और किसानों के बीच जारी गतिरोध खत्म हो गया. बैरिकेड हटते ही हजारों किसान दिल्ली के किसान घाट की ओर कूच कर गए. आंदोलनकारियों के दिल्ली के किसान घाट पहुंचने के साथ ही किसानों का आंदोलन खत्म हो गया. भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत का का कहना है कि 23 सितंबर को शुरू हुई किसान क्रांति पदयात्रा दिल्ली के किसान घाट पर खत्म हो गई. हालांकि हमारी मांगे जारी रहेंगी.

हालांकि किसान आंदोलन के मद्देनजर गाजियाबाद के सभी स्कूल और कॉलेज बुधवार को बंद रहेंगे. जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी ने मंगलवार को इस आशय का आदेश जारी किया. माहेश्वरी ने कहा, ‘किसान आंदोलन के मद्देनजर एहतियात के तौर पर बुधवार को गाजियाबाद के सभी स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे.

विपक्ष ने मोदी सरकार पर किसानों के खिलाफ ‘क्रूर पुलिस कार्रवाई’ का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि गांधी जयंती के अवसर पर किसान शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने के लिए राजघाट जाना चाहते थे. वहीं पुलिस का कहना है कि उन्होंने भीड़ को तितर-बितर करने और दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हल्का बल प्रयोग किया है. प्रदर्शनकारियों में से कई लोगों का कहना है कि वह एक सप्ताह लंबी पदयात्रा में 200 किलोमीटर से ज्यादा लंबी दूरी तय करके हरिद्वार से यहां आए हैं. दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर मौजूद हजारों किसान पूरी तैयारी के साथ आए हैं. सैकड़ों ट्रैक्टरों में उनके पास खाना, पानी, बिछावन, जेनरेटर और तमाम अन्य चीजें मौजूद हैं.

बुधवार को दिन में महिलाओं और बुजुर्गों सहित तमाम प्रदर्शनकारियों ने बार-बार सड़क पर लगे अवरोधकों को पार करने का प्रयास किया. इस वजह से पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. इसके बावजूद किसान डटे रहे और सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ नारे लगाते रहे. दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों को राष्ट्रीय राजधानी के पास आने से रोकने और हिंसा की स्थिति पर नजर बनाए रखने के लिए 3,000 से ज्यादा कर्मियों को तैनात किया था. विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों को रोक कर सरकार ‘किसान विरोधी’ रूख अपना रही है, वहीं केन्द्र सरकार इसका हल निकालने के लिए रास्ते तलाश रही है. केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में इस संबंध में एक आपात बैठक भी हुई है.