Kisan Mahapanchayat Live: मुजफ्फरनगर में बीकेयू अध्यक्ष नरेश टिकैत ने पंचायत का आयोजन किया है. इस आयोजन में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे हैं. लोग इतनी बड़ी संख्या में पहुंचे हैं कि मुजफ्फरनगर का जीआईसी मैदान भी छोटा पड़ गया. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग कॉलेज मैदान के अलावा बाहर खड़े हैं.Also Read - शादी के कार्ड पर किसान आंदोलन की झलक, दूल्हे ने लिखवाया- जंग अभी जारी है, MSP की बारी है

कहा जा रहा है कि ये जनसैलाब किसान नेता राकेश टिकैत के समर्थन में उमड़ा है. अभी किसानों की ये महापंचायत जारी है और माना जा रहा है कि किसान शाम तक वहां से गाजीपुर बॉर्डर के लिए कूच कर सकते हैं. हजारों किसान बीकेयू के समर्थन में नारे लगा रहे हैं और टिकैत बंधुओं का पूरा समर्थन कर रहे हैं. Also Read - UP Election 2022: आरएलडी और सपा को समर्थन देगी भारतीय किसान यूनियन, नरेश टिकैत ने की घोषणा

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सुबह से ही किसान मैदान में पहुंचना शुरू हो गए थे. वहीं पुलिस प्रशासन ने कड़े बंदोबस्त किए. इस महापंचायत पर सभी की निगाहें लगी हैं. माना जा रहा है कि नरेश टिकैत कोई बड़ा एलान कर सकते हैं. महापंचायत में बड़ी संख्या में महिलाएं भी पहुंच रही हैं. रालोद के राष्ट्रीय महासचवि जयंत चौधरी के आने की भी चर्चा है.

इससे पहले प्रशासन और भारतीय किसान यूनियन के बीच संभावित टकराव टल गया. प्रशासन ने किसान पंचायत की इजाजत दे दी. वहीं सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. यातायात सुचारू रहे इसके लिए रूट में फेरबदल किया गया है.

ऐसे पलटा पासा?

गणतंत्र दिवस के मौके पर हुई हिंसा के बाद से जहां एक तरफ बॉर्डर पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी, वहीं अब धीरे धीरे फिर से किसानों में एक नया जोश पैदा हो गया है. गाजीपुर, सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर 26 जनवरी की घटना के बाद से प्रशासन द्वारा भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया, जिसके बाद से किसानों में डर बैठा और बॉर्डर से धीरे धीरे किसान वापस अपने गांव जाने लगे. गाजीपुर बॉर्डर पर गुरुवार शाम तक किसानों की संख्या में कमी देखने को मिली तो शुक्रवार होते ही किसानों की संख्या फिर से बढ़ने लगी है.

गुरुवार शाम भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की आंखों में आए आंसू ने आंदोलन को एक नई धार दे दी है. बॉर्डर पर किसानों में इस बात का आक्रोश है कि हमारे नेता की आंखों में आंसू प्रशासन के कारण आए हैं. उनका कहना है कि भले ही जान चली जाए लेकिन अब ये आंदोलन खत्म नहीं होगा.