नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के सर्वमान्य समाधान के लिए इसे मध्यस्थता के लिये सौंपने के बारे में आदेश सुना दिया. इसके लिए कोर्ट ने तीन लोगों का एक पैनल बनाया है, जिसमें जस्टिस श्रीराम पंचू का नाम भी शामिल है. बता दें कि श्रीराम पंचू सीनियर एडवोकेट और मिडियेटर (मध्यस्थ) हैं. उन्होंने एक मिडियेटर चैंबर की स्थापना की है, जोकि मध्यस्थता की ही सर्विस देता है.

श्रीराम पंचू IMI (इंटरनेशनल मेडिएशन इंस्टीट्यूट) के बोर्ड डायरेक्टर और इंडियन मेडिएटर्स एसोसिएशन के भी डायरेक्टर हैं. इन्होंने साल 2005 में भारत का पहला कोर्ट एन्नेक्स्ड मेडिएशन सेंटर (annexed mediation centre) की स्थापना की थी. पाचू के देश में उपभोक्ता आंदोलनों के सबसे बड़े प्रस्तावकों में से एक माना जाता है. उन्होंने साल 1986 के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के लागू होने से बहुत पहले ऐसा किया था.

कई केस को कर चुके हैं सॉल्व
बता दें कि पंचू को पूरे देश में मध्यस्थता के लिए जाना जाता है. वह कॉमर्शियल से लेकर कॉर्पेरेट और कॉन्ट्रेक्चुअल विवादों से जुड़े देश के कई जटिल केसों में मध्यस्थता कर चुके हैं. इसमें प्रॉपर्टी, दिवालियापन, फैमिली बिजनेस विवाद, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और इनफॉर्मेशन टेक्नॉलजी के विवाद शामिल हैं. इतना ही नहीं इन्होंने कई इंटरनेशनल कॉमर्शियल डिस्प्युट में भी मध्यस्थता की है.

पहले भी सुप्रीम कोर्ट दे चुका है जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले इन्हें असम और नागालैंड के बीच 500 स्क्वायर फीट को लेकर बने विवाद की मध्यस्थता की जिम्मेदारी दी थी. इसके साथ ही उन्हें मुंबई में पारसी कम्युनिटी के पब्लिक डिस्प्युट सहित कई केस में मध्यस्थता की जिम्मेदारी दी गई थी. इन्होंने मध्यस्थता पर दो किताब भी लिखी है.

तीन लोग हैं पैनल में
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर मध्यस्थता के लिए तीन लोगों का पैनल बनाया है, जिसमें श्रीराम पंचू भी एक हैं. इसमें उनके अलावा जस्टिस खलिफुल्लाह और श्रीश्री रविशंकर हैं. इन्हें 4 हफ्ते में मध्यस्थता से मसले का हल निकालने का निर्देश दिया गया है. बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने बुधवार को इस मुद्दे पर विभिन्न पक्षों को सुना था.