
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में गुरुवार की शाम को जोरदार हंगामा हुआ. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कथित कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छापेमारी के दौरान रुकावट डाली. ED का आरोप है कि इस दौरान ममता बनर्जी कोलकाता में I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर में जबरन घुसीं. फिर वहां से कई जरूरी फाइलें और डिवाइस ले गईं.प्रतीक जैन ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के आईटी सेल के हेड भी हैं. ममता ने पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित बताया है. पूरा मामला कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंच चुका है. शुक्रवार को इसपर सुनवाई होनी है.
आइए जानते हैं आखिर क्या है I-PAC? इसके दफ्तर पर ED की छापेमारी के दौरान ऐसा क्या हुआ, जो ममता बनर्जी ने PM नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को चेतावनी तक दे डाली? ममता अपने साथ जो ग्रीन फाइलें लेकर गईं, उनमें कौन सी जानकारियां हैं:-
गुरुवार को क्या हुआ?
ED ने गुरुवार को मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रतीक जैन के घर और ऑफिस में छापेमारी की.पश्चिम बंगाल में 6 और दिल्ली में 4 ठिकानों पर छापेमारी की गई. यह कार्रवाई सुबह 6 बजे से शुरू हुई थी. सुबह 11:30 बजे के बाद मामला बढ़ा. शाम को हंगामा होने लगा.CM ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन के घर पहुंच गईं. जब वो बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक ग्रीन कलर की फाइल थी. इसके बाद वे सॉल्ट लेक स्थित I-PAC के ऑफिस भी गईं. इसके बाद ममता ने गृहमंत्री पर उनकी पार्टी के दस्तावेज उठवाने का आरोप लगाया. CM ममता ने छापेमारी को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और इसके पीछे BJP की साजिश का आरोप लगाया है.
ED का क्या है आरोप?
I-PAC के बारे में जानिए
I-PAC एक राजनीतिक सलाहकार कंपनी है. ये राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति बनाने में मदद करती है. इस संस्था ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर एक स्लोगन लिखा है- Reshaping participatory democracy. इससे यह जाहिर होता है कि यह संस्था, यह दावा करती है कि वह देश में लोकतंत्र को बेहतर बनाने में जुटी है. इस संस्था के संस्थापक हैं रणनीतिकार और जनसुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर.
I-PAC ने 2014 में मोदी के लिए किया था काम
2014 के लोकसभा चुनाव में I-PAC ने BJP और मोदी के लिए काम किया था. इस चुनाव में BJP को सफलता मिली थी और देश में पूर्ण बहुमत से मोदी की सरकार बनी थी.उसके बाद इस संस्था ने 2015 में नीतीश कुमार के लिए काम किया. उसके बाद कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और फिर TMC के साथ संस्था का नाम जुड़ा.
I-PAC और TMC के बीच कब से है कनेक्शन?
ममता की पार्टी TMC और I-PAC का संबंध 2019 से बनना शुरू हुआ. 2021 के विधानसभा चुनाव में इस जोड़ी ने विधानसभा चुनाव में सफलता हासिल की. इसके बाद से यह संबंध काफी मजबूत हो गया. कोलकाता के सॉल्टलेक में I-PAC का ऑफिस है.
प्रतीक जैन I-PAC के डायरेक्टर
प्रतीक जैन I-PAC के तीन डायरेक्टर्स में से एक हैं. उनके अलावा ऋषि राज सिंह और विनेश चांदेल भी डायरेक्टर हैं.प्रतीक जैन के लिंक्डइन प्रोफाइ के मुताबिक वो IIT बॉम्बे से ग्रेजुएट हैं. वे I-PAC के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं. जब प्रशांत किशोर ने 2021 से खुद को आईपैक के कार्यों से अलग करना शुरू कर दिया, तो प्रतीक जैन खुलकर सामने आए और नेतृत्व संभाला. हालांकि, प्रतीक जैन अपने बायो में यह नहीं बताते हैं कि वे TMC के आईटी सेल के मैनेजर या हेड भी हैं.
कलकत्ता हाईकोर्ट में होनी है मामले की सुनवाई
सबूतों से छेड़छाड़ के मामले में ED ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.I-PAC ने भी सर्च की वैधता को चुनौती दी है. मामले की सुनवाई शुक्रवार को जस्टिस सुवरा घोष की बेंच में होगी. दूसरी ओर, ED की इस कार्रवाई के विरोध में ममता बनर्जी शुक्रवार को 2 बजे मार्च निकालेंगी. जबकि, प्रतीक जैन के परिवार ने शेक्सपीयर सरानी पुलिस स्टेशन में ED अधिकारियों के खिलाफ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की चोरी का आरोप लगाते हुए शिकायत कराने का फैसला किया है.
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