टाटा स्टील कोलकाता साहित्य महोत्सव में शनिवार को विरोध-प्रदर्शन के बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के विवादित छात्र कन्हैया कुमार के कार्यक्रम को छोटा करना पड़ा। जेनएयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार यहां रबींद्र सरोवर स्टेडियम में आयोजित कोलकाता साहित्य महोत्सव में शनिवार को एक सत्र को संबोधित करने वाले थे।

कन्हैया सत्र के दौरान संचालक मुदार पाथेर्या के प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्हें वहां बैठे आधा घंटा हो चुके थे। तभी धुर वामपंथी दलों से संबद्ध कुछ युवा कार्यकर्ता हाथों में नारे लिखी तख्तियां लिए खड़े हो गए और कन्हैया से अपने सवालों का जवाब देने के लिए कहने लगे।

कन्हैया ने उन्हें शांत कराने की कोशिश की और कहा कि सत्र में प्रश्नोत्तरी सत्र के दौरान वह सभी लोगों के सारे सवालों का जवाब देंगे। यह भी पढ़ें: ‘उन्‍हें जेएनयू में 3000 कॉन्डोम मिल गए, एक लापता छात्र नहीं मिल रहा’: कन्हैया

बस्तर सोलिडैरिटी नेटवर्क इंडिया के कार्यकर्ताओं ने लेकिन नारेबाजी शुरू कर दी और कन्हैया की कारोबारियों द्वारा आयोजित साहित्य महोत्सव में हिस्सा लेने का विरोध करने लगे।

वामपंथी कार्यकर्ता ‘कश्मीर मांगे आजादी’ और ‘मकबूल मांगे आजादी’ जैसे नारे लगा रहे थे। कार्यकर्ता अपने हाथों में नारे लिखी तख्तियां हवा में लहरा रहे थे, जिससे वहां बैठे दर्शकों को मंच का दृश्य नजर नहीं आ रहा था।

कन्हैया ने यह कहकर जरूर कुछ हद तक विरोध प्रदर्शन को शांत कर दिया कि ‘यह विरोध प्रदर्शन का नया तरीका है और मैं इसे जेएनयू में इस्तेमाल करूंगा’।

लेकिन करीब 20 मिनट बाद विरोध प्रदर्शन फिर से तेज हो गया। वहां तैनात पुलिकर्मियों ने मंच को घेर लिया और कन्हैया के बचाव के लिए उनके चारों ओर रस्सी का घेरा बनाना पड़ा। कन्हैया इस बीच लगातार प्रदर्शनकारियों से सत्र चलने देने का आग्रह करते रहे।

लेकन कुछ प्रदर्शनकारी मंच पर चढ़कर माइक के जरिए अपने सवाल पूछने लगे। इस बीच कन्हैया ने उनमें से एक प्रदर्शनकारी से पूछा कि क्या वह कम्युनिस्ट है तो प्रदर्शनकारी ने ‘हां’ कहकर जवाब दिया।

इस पर कन्हैया ने पूछा, “किस पार्टी से?” इस पर प्रदर्शनकारी का जवाब था, “मेरी कोई पार्टी नहीं है।” इस पर कन्हैया ने कहा, “फिर तुम कम्युनिस्ट नहीं हो। जाओ पहले मार्क्‍स और लेनिन को ठीक से पढ़ो।” आयोजक और कन्हैया के कुछ साथी प्रदर्शनकारियों को शांत कराने की कोशिश करते रहे, लेकिन वे शांत होने को तैयार नहीं थे।

दर्शक दीर्घा में बैठे कुछ वरिष्ठ दर्शकों द्वारा तीखी आलोचना किए जाने पर प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन और तेज कर दिया। हो-हंगामे के बीच कन्हैया को अपना सत्र बीच में ही समाप्त करना पड़ा।

कन्हैया ने वहां से जाते-जाते कहा, “मैं दर्शकों से माफी मांगता हूं। मैं उनके सवालों के जवाब देना पसंद करता, लेकिन ये मेरे दोस्त मुझे बोलने ही नहीं दे रहे। मुझे कोलकाता में ऐसा होने की उम्मीद नहीं थी।”