नई दिल्ली: पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ की कोशिश के बाद पहले हिरासत, फिर छोड़े और अब ममता बनर्जी द्वारा धरना प्रदर्शन किया जा रहा है. ममता के साथ धरने पर बैठे राजीव कुमार चर्चा का विषय बने हुए हैं. राजीव कुमार को बचाने के लिए ममता बनर्जी धरने पर बैठ गई हैं. उन्होंने राजीव कुमार को दुनिया का सबसे ईमानदार अधिकारी बताया है. वहीं, ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता उनके लिए रेल तक रोक रहे हैं. टीएमसी कार्यकर्ताओं ने ट्रेनों को रोकने के लिए पटरी पर प्रदर्शन शुरू कर किया है. वह ‘रेल रोको प्रोटेस्ट’ कर रहे हैं.

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राजीव कुमार के पीछे सीबीआई को ही अरेस्ट करा देने वाली ममता बनर्जी खुलकर सामने आ गई हैं. और राजीव का पक्ष ले रही हैं. राजीव कुमार को ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है. राजीव पश्चिम बंगाल के 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. राजीव कुमार 2016 में पश्चिम बंगाल के पुलिस कमिश्नर बने. 2013 में शारदा चिटफंड घोटाला मामले की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के अध्यक्ष चुना गया था. राजीव कुमार उत्तर प्रदेश के संभल इलाके चंदौसी के रहने वाले हैं. उनके पिता एक कॉलेज में यहां पढ़ाते थे. राजीव की मां चंदौसी में ही रहती हैं.

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राजीव कुमार पर आरोप है कि उन्होंने जांच ठीक ढंग से नहीं की. अब वह खुद ही जांच के दायरे में आ गए हैं. बताया जाता है कि एसआईटी के अध्यक्ष के तौर पर राजीव कुमार ने जम्मू-कश्मीर में शारदा प्रमुख सुदीप्त सेन और उनके सहयोगी देवयानी को गिरफ्तार किया था. इस मामले में कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने राजीव कुमार को आरोपित किया था.

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ये है चिटफंड घोटाला
पश्चिम बंगाल का चर्चित चिटफंड घोटाला 2013 में सामने आया था. कथित तौर पर तीन हजार करोड के इस घोटाले का खुलासा अप्रैल 2013 में हुआ था. आरोप है कि शारदा ग्रुप की कंपनियों ने गलत तरीके से निवेशकों के पैसे जुटाए और उन्हें वापस नहीं किया. इसके बाद इस घोटाले को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर सवाल उठे थे. चिट फंड एक्ट-1982 के मुताबिक चिट फंड स्कीम का मतलब होता है कि कोई शख्स या लोगों का समूह एक साथ समझौता करे. इस समझौते में एक निश्चित रकम या कोई चीज एक तय वक्त पर किश्तों में जमा की जाए और तय वक्त पर उसकी नीलामी की जाए.जो फायदा हो बाकी लोगों में बांट दिया जाए. इसमें बोली लगाने वाले शख्स को पैसे लौटाने भी होते हैं.