नई दिल्ली| कूलभूषण जाधव की फांसी पर हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ने गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद आखिरी फैसला आने तक रोक लगा दी है. कोर्ट में मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान के तेवर नहीं बदले हैं. पाकिस्तान अब भी इस बात पर अड़ा है कि जाधव ने कई हत्याओं को अंजाम दिया है. पाकिस्तान ने भारत पर मानवाधिकार के नाम पर दुनिया को भटकाने का आरोप लगाया है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत एक ऐसे शख्स को बचाने की कोशिश कर रहा है जिसने निर्दोष पाकिस्तानियों की जान ली. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आज कहा कि भारत ने इस मामले में मानवता के बारे न सोचते हुए दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश की है. हम जाधव के खिलाफ कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश करेंगे.


वहीं, पाकिस्तान डिफेंस की ओर से कई ट्वीट किए गए हैं जिसमें इसने साफ कर दिया है कि वह आईसीजे के निर्णय को नहीं मानेगा. पाकिस्तान डिफेंस ने लिखा कि दुनिया की किसी भी अदालत के पास एक संप्रभु राज्य के द्वारा लिए गए फैसले को निरस्त करने का अधिकार नहीं है. हम लड़ेंगे. एक अन्य ट्वीट में लिखा कि आईसीजे का निर्णय पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों पर लागू नहीं होता है. अंत में भारत की हार होगी.

आईसीजे का फैसला अंतिम, पर बाध्यकारी नहीं  

बता दें आईसीजे के पास अपने फैसलों को लागू करवाने का अधिकार तो नही हैं लेकिन इसका फैसला अंतिम होता है और उसके खिलाफ कहीं अपील नहीं की जा सकती है. आईसीजे संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत स्थापित किया गया है और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में साफ कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों को उन सभी मामलों में आईसीजे के आदेशों का पालन करना होगा, जिसमें वे पक्षकार हैं. यहां भारत और पाकिस्तान दोनों ने ही इस पर सहमति जताई थी. ऐसे में पाकिस्तान यदि आईसीजे के फैसले से इनकार करता है तो फिर भारत को यह मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाना होगा.

गौरतलब है कि गुरुवार से पहले हुई सुनवाई में भारत ने अपनी दलील रखते हुए मांग की थी कि जाधव की मौत की सजा को तत्काल निलंबित किया जाए. भारत ने आशंका जताई थी कि पाकिस्तान आईसीजे में सुनवाई पूरी होने से पहले जाधव को फांसी दे सकता है. इस मामले में भारत ने दमदार तरीके से अपने तर्क पेश किये थे. जबकि पाकिस्तान ने कुलभूषण के कबूलनामा वाले फर्जी वीडियो और फर्जी पासपोर्ट को अपनी दलीलों का आधार बनाया था.