नई दिल्ली: जाने-माने वकील हरीश साल्वे ने गुरुवार को कहा कि ‘मैं बेशक आशावादी हूं और अगर पाकिस्तान कुलभूषण जाधव मामले में निष्पक्ष सुनवाई करने में विफल रहता है तो हम फिर से अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में जाएंगे. भारत के पूर्व महाधिवक्ता साल्वे ने आईएएनएस को ईमेल के जरिए भेजी अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के आदेश के बाद पाकिस्तान सैन्य अदालत में भी जाधव मामले में निष्पक्ष सुनवाई करने को बाध्य है.

पाकिस्तान में जाधव मामले में निष्पक्ष सुनवाई के संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में साल्वे ने कहा कि मुझे ऐसी ही आशा है, लेकिन यह इसलिए है कि मैं बेशक आशावादी हूं. साल्वे ने हेग स्थित आईसीजे में जाधव मामले की सुनवाई के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक रुपया फीस लिया है. दूसरी ओर, पाकिस्तान को जाधव को भारतीय जासूस साबित करने की कोशिश के लिए वकीलों पर 20 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च उठाना पड़ा है.

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आईसीजे ने बुधवार को पाकिस्तान को जाधव को फांसी नहीं देने का आदेश देते हुए उनको सैन्य अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा पर दोबारा विचार करने को कहा है. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान को जाधव को दूतावास की पहुंच प्रदान करने का भी निर्देश दिया है. आईसीजे ने कहा कि उनको इस अधिकार से वंचित करके पाकिस्तान ने वियना संधि का उल्लंघन किया है. साल्वे इस समय लंदन में रहते हैं. उनका मानना है कि दूतावास की पहुंच होने से जाधव मामले में पाकिस्तान की सैन्य अदालत में मजबूती के साथ बचाव किया जाएगा.

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उनसे जब पूछा गया कि भारत सैन्य अदालत में सुनवाई के दौरान जाधव के मानवाधिकार के मसले का समाधान किस प्रकार करेगा तो उन्होंने कहा, “सतर्क रहते हुए और उनसे लगातार संपर्क बनाकर किया जा सकेगा. निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने पर साल्वे ने माना कि ऐसे गंभीर राजनीतिक परिदृश्य में कूटनीति सबसे अच्छा विकल्प है जिसके जरिए अधिकारी जाधव को वापस भारत ला सकते हैं. साल्वे ने फिर कहा है कि पाकिस्तान को गंभीर फैसले की अहमियत समझनी चाहिए. अगर ऐसा होता है तो फिर कूटनीति मुख्य चैनल होगी.