नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन को कवि कुमार विश्वास ने देश का बड़ा नुकसान बताया है. उन्होंने अटलजी को दूसरा अजातशत्रु भी बताया. विश्वास ने कहा कि समावेशी राजनीति में जो विचारों का विश्वविद्यालय है, उसका कुलपति चला गया. वाजपेयी भारतीय राजनीति के उत्सव मूर्ति थे, उनके आस-पास राजनीति का उत्सव नाचता था. Also Read - दिल्ली का एम्स ही बना कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट, 479 पॉजिटिव मामले मिले

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विश्वास ने कहा कि पिछले सौ वर्षों में लाल बहादुर शास्त्री के बाद वाजपेयी, दूसरे ऐसे अजातशत्रु थे जिनके विपक्षी तो हुए लेकिन विरोधी कोई नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक दल में कुछ लोग इस ‘अटलवादी‘ विचारधारा के होते हैं जो सौम्य हैं, शालीन हैं, जो बात को गंभीरता से उठाते हैं और संसद से लेकर सड़क तक भाषा की मर्यादा का ध्यान रखते हैं.

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उन्होंने कहा कि वाजपेयी की महत्वाकांक्षा बस इतनी थी कि जीवन में कोई अपयश नहीं हो और जब जाउं तो लोग याद करें. यह बात उन्होंने अपने साक्षात्कारों में भी कही. विश्वास ने कहा कि अटलजी का जाना कवियों के खानदान के लिये भी बड़ा नुकसान है. यह पत्रकारिता का नुकसान है, कविता का नुकसान है, राजनीति का नुकसान है, कुल मिलाकर देश का नुकसान है.

उन्होंने कहा कि कविता और भाषा दोधारी तलवार है, लेकिन वाजपेयी ने उस तलवार का इस्तेमाल ऐसे किया कि न अपना हाथ काटा, न दूसरे का सिर काटा. उन्होंने मुद्दे को खड़ा करने के लिए कविता का इस्तेमाल किया.

बता दें कि वाजपेयी करीब 9 हफ्ते से एम्स में भर्ती थे. बुधवार शाम को उनकी तबियत बेहद नाजुक हो गई थी और उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था. गुरुवार को हालत और नाजुक हो गई और दिन भर नेताओं का उनसे मिलने का सिलसिला तेज हो गया. पीएम नरेंद्र मोदी, तमाम मंत्री, बीजेपी नेता और राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेता एम्स पहुंचे. शाम 5.05 मिनट पर उनका निधन हो गया. एम्स ने मेडिकल बुलेटिन जारी कर उनके निधन की जानकारी दी.

(भाषा इनपुट)