नई दिल्ली: नोटबंदी पर संसद में जारी हंगामें को लेकर बीजेपी के सिनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी ने गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से मुलाकात की। इस मुलाकात के एक दिन पहले बुधवार को आडवाणी ने लोकसभा की कार्यवाही हो रही दिक्कतों को शर्मनाक करार दिया था और सुमित्रा महाजन और संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार से सदन का संचालन न हो पाने के लिए अपनी नाखुशी का इजहार किया था।

शीतकालीन सत्र खत्म होने में मात्र चार दिन बाकी रह गए हैं, लेकिन संसद का यह पूरा सत्र नाकाम हो जाना लगभग तय है. सूत्रों के अनुसार, महाजन ने सदन का गतिरोध खत्म करने के लिए आडवाणी से सुझाव मांगे हैं। यह भी पढ़े-संसद में गतिरोध जारी, आडवाणी हुए नाराज

वही दूसरी तरफ मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में पिछले करीब 17 दिनों से चल रहे लगातार हंगामे पर राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गहरी नाराजगी जताई है। राष्ट्रपति ने सरकार और विपक्ष के बीच चल रहे गतिरोध को खत्‍म करने की अपील करते हुए कहा कि संसद की कार्यवाही में बाधा किसी भी सूरत में स्‍वीकार्य नहीं है।

आडवाणी ने मीडिया से कोई बात नहीं की, महाजन ने बाद में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि आडवाणी जी जैसे दिग्गज राजनेता रोज संसद आते हैं और वहां क्या हो रहा है देखते हैं। यह सदन बहस के लिए है और हमलोग पहले ही इतने दिन गंवा चुके हैं।

सूत्रों ने कहा कि आडवाणी ने लोकसभा अध्यक्ष को सुझाव दिया कि जो सदन में अराजकता पैदा कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई करें या उनका वेतन कटौती करें। यह भी पढ़े-संसद की कार्यवाही में बाधा अस्वीकार्य: राष्ट्रपति

सुमित्रा महाजन ने हंगामा कर रहे सदस्यों को यह चेतावनी दी कि यदि उन्होंने विरोध करना और बोलने वाले दूसरे नेताओं को बीच में टोकना बंद नहीं किया तो ‘कठोर कदम’ उठाया जाएगा। इसके बावजूद लोकसभा की कार्यवाही हंगामें की भेंट चढ़ गया।

राष्ट्रपति भी संसद में जारी गतिरोध पर यह कहते हुए अपनी नाखुशी का इजहार कर चुके हैं कि ‘संसद में हंगामा पूरी तरह से अस्वीकार्य है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता शांता कुमार भी लोकसभा अध्यक्ष को बुधवार को हंगामा करने वाले सदस्यों का वेतन और भत्ता रोकने और सदस्यों को निष्कासित करने तक की अनुशासनिक कार्रवाई करने के लिए लिखा है।

प्रणब ने साफ किया कि वह किसी खास पार्टी या व्यक्ति पर निशाना नहीं साध रहे, क्योंकि यह सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, ‘तथ्य है कि यह बाधा आम बात हो गई है, जिसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। चाहे कितने भी मतभेद हों, हमारे पास अपनी बात खुलकर कहने का मौका होता है। कोई भी अदालत सदन में कही गई बातों में दखल नहीं दे सकती।’ प्रणब ने कहा कि यदि कोई सदस्य किसी पर आरोप लगाता भी है, तो कोई अदालत उस पर मुकदमा नहीं चला सकती, क्योंकि उसने ऐसा सदन में कहा है।