नई दिल्ली: जहां एक तरफ भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद गतिरोध के समाधान के लिए बातचीत कर रहे हैं तो वहीं रिपोर्ट्स की मानें तो बीजिंग ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास फाइबर ऑप्टिकल केबल को बिछाना और 5जी के लिए अन्य सामाग्रियों को इंस्टॉल करना शुरू कर दिया है. बता दें कि 5जी पांचवी पीढ़ी की वायरलेस टेक्नोलॉजी है. चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी के जवानों को पैंगॉन्ग झील के पास बैरक और अन्य संरचनाओं का निर्माण करते देखा गया है.Also Read - China-Taiwan conflict: बन रहे युद्ध जैसे हालात, अब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कह दी ये बड़ी बात

खुफिया एजेंसियों ने कहा कि 5जी के लिए निर्माण को देमचोक क्षेत्र में अगस्त के पहले माह में नोटिस किया गया, जोकि एलएसी के पास विवादास्पद स्थलों में से है. एजेंसी ने इस बारे में अलर्ट करते हुए कहा कि चीन एक तरफ कह रहा है कि वो विवादास्पद स्थल से पीछे हट जाएगा, लेकिन दूसरी तरफ पैंगॉन्ग क्षेत्र में निर्माण कार्य देखा गया है. Also Read - 'भर्ती बंद होने से जवानों की संख्या घट रही है'; वायु सेना प्रमुख बोले- पूर्वी लद्दाख में पिछले साल जो हालात बने उससे हम वाकिफ नहीं थे

पैंगॉन्ग झील के पास नए झोपड़ी नुमा निर्माण और शेड देखे गए हैं. यह तब हो रहा है, जब दोनों देश पीछे हटने के लिए वार्ता कर रहे हैं. मई के शुरुआती सप्ताह में चीन और भारत की सेना एक दूसरे के आमने-सामने आ गई थी. हालांकि शुरुआत में गलवान घाटी, पैंगॉन्ग झील के पेट्रोल प्वाइंट 15 और गेगरा-हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में सेनाएं पीछे हटीं. Also Read - भारतीय सेना की तवांग में चीनी टैंकों को नेस्तनाबूद करने की ट्रेनिंग; देखें Video

पैंगॉन्ग झील के पास, चीन ने फिंगर-5 और 8 के पास अपनी स्थिति काफी मजबूत की है और भारत इस कदम का जोरदार विरोध करता रहा है. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी(पीएलए) ने मई के बाद से फिंगर-4 से फिंगर-8 तक कई तरह के निर्माण किए हैं और इस 8 किलोमीटर की पट्टी से पूर्व की तरफ हटने से उसने इनकार कर दिया है.

जैसा की चीन पीछे नहीं हट रहा है, दिल्ली में भविष्य की रणनीति को लेकर कई दौर की बाचतीच हुई है. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने भी कहा है कि अगर वार्ता विफल रहती है तो भारत सैन्य विकल्पों के बारे में विचार करेगा. पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पास स्थिति की समीक्षा के लिए सुरक्षा प्रतिष्ठानों में लगातार बैठकें हुई हैं.

चीन ने अबतक भारत के नियंत्रण वाले क्षेत्र पर शेल्टर बनाकर या फिर कैंप का निर्माण कर यथास्थिति को बदलने की कोशिश की है. भारत ने पाया कि चीनी सेना ने एलएसी के तीन सेक्टरों- पश्चिमी (लद्दाख), मध्य (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश) और पूर्वी (सिक्किम, अरुणाचल) में जवानों को तैनात करना और वहां हथियारों को लाना शुरू कर दिया है.

खुफिया एजेंसियों ने पहले भी अलर्ट जारी किया था कि चीन ने लिपुलेख दर्रा के पास जवानों को एकत्रित करना शुरू कर दिया है. लिपुलेख दर्रा भारत, नेपाल और चीन के बीच कलापानी घाटी में स्थित एक ट्राइ-जंक्शन है. 15 जून को, गलवान घाटी में भारतीय सेना और चीनी जवानों के बीच हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवान मारे गए और अज्ञात संख्या में चीनी सैनिक मारे गए थे.

(इनपुट आईएएनएस)