नई दिल्ली: भारत और चीन की सेनाओं ने शनिवार को “सकारात्मक” रुख के साथ उच्चस्तरीय सैन्य बातचीत की और पूर्वी लद्दाख में करीब एक महीने से सीमा पर जारी गतिरोध को शांतिपूर्ण संवाद के माध्यम से समाप्त करने का संकेत दिया. घटनाक्रम से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी. भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व तिब्बत सैन्य जिले के कमांडर कर रहे थे. सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर बताया, ‘‘सकारात्मक माहौल में बातचीत हुई. रुख (दोनों पक्षों का) सकारात्मक था.’’ Also Read - देश में साइबर क्राइम में 200% इजाफा, PMO ने कहा- चीन को जिम्मेदार ठहराने के सबूत नहीं

सूत्रों ने बताया कि चुशूल सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा के चीनी पक्ष की तरफ माल्डो में सीमा कर्मी बैठक स्थल पर सुबह करीब साढ़े आठ बजे वार्ता प्रस्तावित थी, लेकिन ऊंचाई वाले क्षेत्र में खराब मौसम की वजह से यह करीब तीन घंटे तक टल गयी. उन्होंने कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले चीनी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने गर्मजोशी से भारतीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया. सेना और विदेश मंत्रालय ने इस बहु-प्रतीक्षित बैठक के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. Also Read - विदेश सचिव बोले- भारत कूटनीतिक और सैन्य स्तर के माध्यमों से कर रहा है चीन के साथ बातचीत

दोनों देश पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में विशेष रूप से पैंगोंग त्सो के उत्तरी तट पर गतिरोध को हल करने के लिए बातचीत कर रहे हैं, जहां चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने यथास्थिति को बदलने का प्रयास किया है. जो क्षेत्र अभी तक भारतीय नियंत्रण में हैं, वहां चीनी सैनिकों ने शिविर लगाकर यथास्थिति को बदलने का प्रयास किया है. Also Read - डोभाल से बातचीत के बाद अब आया चीन का बयान, कहा- तनाव कम करने को लेकर ‘सहमति’ बनी

बातचीत के बारे में कोई खास विवरण दिये बिना, भारतीय सेना के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘भारत और चीन के अधिकारी भारत-चीन सीमावर्ती इलाकों में बने वर्तमान हालात के मद्देनजर स्थापित सैन्य एवं राजनयिक माध्यमों के जरिए एक-दूसरे के लगातार संपर्क में बने हुए हैं.’’

सूत्रों के मुताबिक, आज की बैठक में पैंगोंग सो लेक, फिंगर फोर और फिंगर फाइव में चीन के बढ़ते दबाव और एक्स्ट्रा तैनाती के साथ चीन ने जो टेंट और कैंप के साथ परमानेंट स्ट्रक्चर बनाया है उसके बारे में बातचीत की गई. खबरों के मुताबिक ड्रैगन से भारत ने साफ कहा है कि वह अप्रैल 2020 का स्टेटस कायम करे और वापस उसी सीमा पर लौट जाए.

सूत्रों ने कहा कि दोनों सेनाओं में स्थानीय कमांडरों के स्तर पर 12 दौर की बातचीत तथा मेजर जनरल रैंक के अधिकारियों के बीच तीन दौर की बातचीत के बाद कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने पर शनिवार को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर पर बातचीत हुई. उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता से एक दिन पहले दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर बातचीत हुई और इस दौरान दोनों पक्षों में अपने “मतभेदों” का हल शांतिपूर्ण बातचीत के जरिये एक-दूसरे की संवेदनाओं और चिंताओं का ध्यान रखते हुए निकालने पर सहमति बनी थी.

समझा जाता है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी, पैंगोंग सो और गोगरा में यथा स्थिति की पुन:बहाली के लिये दबाव बनाया. इससे पहले सूत्रों ने कहा था कि भारतीय पक्ष क्षेत्र में चीनी सैनिकों द्वारा बड़े सैन्य निर्माणों पर अपनी आपत्ति जताएगा. वहीं समाचार एजेंसी एएनआई ने कहा है कि सेना बातचीत के ब्‍यौरे को विदेश मंत्रालय और सरकार के संबंधित अधिकारियों से साझा करेगी.

भारतीय प्रतिनिधिमंडल एलएसी (LAC) मोल्डो में बातचीत करने के बाद वापस लेह के लिए लौट गया. भारत का प्रतिनिधिमंडल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे और उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी सहित उच्च अधिकारियों को वार्ता के बारे में पूरी जानकारी देगा, उसके बाद सेना मुख्यालय में सैन्य संचालन महानिदेशालय भी चर्चा के बारे में विदेश मंत्रालय और अन्य संबंधित सरकारी अधिकारियों को जानकारी देगा.

बता दें कि पिछले महीने की शुरुआत में गतिरोध पैदा होने के बाद भारतीय सैन्य नेतृत्व ने फैसला किया था कि भारतीय जवान पैंगोंग सो, गलवान घाटी, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी के सभी विवादित क्षेत्रों में चीनी सैनिकों के आक्रामक रवैये के खिलाफ दृढ़ रुख अपनाएंगे. माना जा रहा है कि चीनी सेना ने पैंगोंग सो और गलवान घाटी में करीब 2,500 सैनिकों की तैनाती की है और इसके अलावा वह धीरे-धीरे वहां अपने अस्थायी ढांचों और हथियारों को भी बढ़ा रहा है.

(इनपुट एजेंसी)