India-China Eighth Round Commander level Talks Today: लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए आज आठवें दौर की बातचीत होगी. इस बातचीत में भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख में गतिरोध वाले सभी स्थानों से चीनी सैनिकों की पूर्ण वापसी पर जोर देगी. इस बीच इस वार्ता से एक दिन पहले ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कर दिया था कि भारत मतभेदों का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है लेकिन इसके साथ ही वह ‘एकपक्षवाद और आक्रामकता’ से अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है और चाहे इसके लिए कितनी बड़ी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े. Also Read - J&K Latest News: जम्‍मू-कश्‍मीर के पुंछ में पाकिस्‍तान की फायरिंग में JCO शहीद

राजनाथ के इस कड़े और स्पष्ट रुख से यह तय है कि भारत एलएसी पर विवाद को सुलझाने के लिए चीन की ओर से किसी भी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा. कल राजनाथ ने यह भी कहा था कि शांति के लिए युद्ध को रोकने की क्षमता हासिल करना महत्वपूर्ण है. उनके इस बयान को आज से चीन के साथ होने वाली वार्ता के संदर्भ में भी देखा जा रहा है. Also Read - LAC पर ठंड से बेहाल चीनी सैनिक, मन बहलाने के लिए कर रहे हैं ये काम

भारत-चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच बैठक आज सुबह साढ़े नौ बजे पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारतीय क्षेत्र की तरफ चुशूल में होगी. पूर्वी लद्दाख में हाड़ जमा देने वाली सर्दी में भारत के लगभग 50,000 सैनिक किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्वतीय ऊंचाइयों पर तैनात हैं. छह महीने से चले आ रहे इस गतिरोध को लेकर दोनों देशों के बीच पूर्व में हुई कई दौर की बातचीत का अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है. अधिकारियों के अनुसार चीनी सेना ने भी लगभग 50,000 सैनिक तैनात कर रखे हैं. Also Read - Torbaaz: नेटफ्लिक्स पर इस दिन रिलीज होगी संजय दत्त की फिल्म 'टोरबाज', बचकर रहना दुश्मनों क्योंकि...

कोर कमांडर स्तर की पिछले दौर की वार्ता 12 अक्टूबर को हुई थी, लेकिन इसका भी कोई ठोस परिणाम नहीं निकला था. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल में कहा था कि भारत और चीन के बीच ‘‘गंभीर तनाव’’ है तथा सीमा प्रबंधन को लेकर दोनों पक्षों द्वारा किए गए समझौतों का सम्मान किया जाना चाहिए. आठवें दौर की वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन करेंगे जो लेह आधारित 14वीं कोर के नए कमांडर हैं.

पिछले दौर की वार्ता के बाद दोनों सेनाओं ने संयुक्त बयान जारी कर कहा था कि दोनों पक्ष सैन्य एवं कूटनीतिक माध्यमों से वार्ता तथा संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए हैं जिससे कि ‘‘जल्द से जल्द’’ पारस्परिक रूप से सहमति वाले समाधान पर पहुंचा जा सके.

छठे दौर की सैन्य वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने अग्रिम मोर्चे पर और सैनिक न भेजने, जमीन पर स्थिति को एकतरफा ढंग से बदलने से बचने और स्थिति को बिगाड़ने वाली कोई कार्रवाई न करने जैसे कुछ कदमों की घोषणा की थी. भारत कहता रहा है कि सैनिकों को हटाने और तनाव कम करने की जिम्मेदारी चीन की है.