नई दिल्ली, 10 नवंबर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बुजुर्ग दिग्गजों ने बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अध्यक्ष अमित शाह पर सवाल उठाए हैं। लालकृष्ण आडवाणी सहित इन बुजुर्ग नेताओं ने हार की ‘मुकम्मल समीक्षा’ की मांग की है, लेकिन साथ ही कहा है कि यह समीक्षा वे लोग नहीं कर सकते जो इस हार के लिए जिम्मेदार हैं। यह भी पढ़े-हार के बाद मांझी ने बीजेपी और RSS पर बोला हमला Also Read - Coronavirus लॉकडाउन में ये काम कर रहे हैं PM मोदी, शेयर किए 3D Videos

भाजपा के दिग्गजों लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा और शांता कुमार ने मोदी के नेतृत्व को चुनौती देते हुए कहा है कि बिहार की हार ने यह दिखा दिया है कि पार्टी ने फरवरी में दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के हाथों मिली करारी हार से कोई सबक नहीं सीखा। Also Read - Covid-19 Fight: कोरोना से लड़ने के लिए केंद्र सरकार का एक और बड़ा कदम, गठित हुईं 11 टीमें

पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा के हस्ताक्षर वाले इन नेताओं का साझा बयान एक बैठक के बाद जारी हुआ। बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी भी शामिल हुए, जिन्होंने बिहार की हार के लिए सार्वजनिक रूप से मोदी, शाह और वित्तमंत्री अरुण जेटली को जिम्मेदार ठहराया है। यह भी पढ़े-बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में जीते हुए उम्मीदवारों की पूरी सूचि Also Read - राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, बोले- अचानक बंद होने से भय और भ्रम पैदा हो गया है

तल्खी से भरे बयान में कहा गया है, “बिहार के नतीजे बता रहे हैं कि दिल्ली की नाकामी से कुछ नहीं सीखा गया। यह कहना कि बिहार में हार के लिए सभी लोग जिम्मेदार हैं, किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराए जाने को सुनिश्चित करना है।”

आडवाणी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि बिहार के नतीजों की समीक्षा होनी चाहिए, लेकिन “यह समीक्षा किसी भी हालत में उन लोगों द्वारा नहीं की जानी चाहिए, जिन्होंने चुनाव प्रबंधन किया था और जो बिहार में प्रचार के लिए जिम्मेदार हैं।”

मोदी और उनके विश्वासपात्र अमित शाह पर सीधे हमला करते हुए बयान में कहा गया है, “हार के कारणों की पूरी तरह समीक्षा होनी चाहिए और यह भी देखा जाना चाहिए कि पार्टी कुछ लोगों के कहे अनुसार चलने पर मजबूर क्यों हुई है और यह कि कैसे उसका आम सहमति वाला चरित्र नष्ट कर दिया गया है।”

साझा बयान में कहा गया है कि बिहार में पार्टी की हार की मुख्य वजह यह है कि “पार्टी किस हद तक शक्तिहीन हो गई है।”