नई दिल्ली| चारा घोटाले से जुड़े और देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी के मुकदमे में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सीबीआई अदालत ने साढ़े तीन साल की सजा सुनाई है. साथ ही लालू को 5 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया. इसके बाद लालू के ट्वीटर हैंडल से ट्वीट किया गया जिसमें लालू यादव ने कोर्ट का फैसला सुनाए जाने के बाद कहा कि बीजेपी का नियम है कि हमारे हिसाब से चलो नहीं तो ठिकाने लगा दिए जाओगे लेकिन मैं बीजेपी की राह में चलने के बजाए सामाजिक न्याय, सद्भाव और समानता के लिए खुशी से मरना पसंद करूंगा. Also Read - Lalu yadav Bail: धरे रह गए राजद के अरमान, नहीं मिली लालू को बेल, फैसला अब 11 दिसंबर को

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जेल जाने के बाद भी लालू ट्विटर के जरिए संदेश देते रहे हैं. खबर थी कि उनके ट्विटर हैंडल को उनके करीबी मैनेज कर रहे हैं क्योंकि जेल जाने के बाद लालू ने ट्वीट किया था कि प्रिय साथियों, कारागार प्रवास के दौरान मेरे ट्विटर हैंडल का संचालन मेरा कार्यालय और परिवार के सदस्य करेंगे. समय-समय पर मुलाकातियों के मार्फत कार्यालय को संदेश पहुंचेगा, जो आपके पास ट्विटर या अन्य विधा से पहुंच जाएगा. संगठित रहिए, सचेत रहिए. Also Read - Bihar Politics: जेल से फोन करने पर फंसे लालू प्रसाद यादव, बंगले से रिम्स में कराए गए शिफ्ट

लालू यादव को अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 420, 467, 471एवं 477ए के तहत जहां साढ़े तीन वर्ष कैद एवं पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी वहीं उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम:पीसी एक्टः की धारा 13 (2) के तहत 13(1) सी एवं डी के आधार पर दोषी करार देते हुए भी अलग से साढ़े तीन वर्ष की कैद एवं पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी. अदालत ने बाद में स्पष्ट किया कि लालू की दोनों सजायें एक साथ चलेंगी.

चारा घोटाला मामले में लालू यादव को साढ़े तीन साल की जेल, 5 लाख जुर्माना

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जुर्माना न अदा करने की स्थिति में लालू यादव को छह माह अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी. इसी प्रकार, बिहार के पूर्व मंत्री एवं लालू के निकट सहयोगी रहे आर के राणा को अदालत ने भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत दोषी पाते हुए साढ़े तीन वर्ष कैद एवं पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी.

उन्हें भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के तहत अलग से साढ़े तीन वर्ष कैद एवं पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी गयी. राणा की भी दोनों सजायें एक साथ चलेंगी. अदालत ने बिहार की लोक लेखा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष जगदीश शर्मा को सात वर्ष कैद एवं कुल बीस लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी.

इसके अलावा अदालत ने तीन पूर्व वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों महेश प्रसाद, फूलचंद एवं बेक जूलियस को साढ़े तीन-साढ़े तीन वर्ष कैद एवं पांच-पांच लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनायी.

सजा की अवधि तीन वर्ष से अधिक होने के चलते अब इन तीनों नेताओं एवं आइएएस अधिकारियों को जमानत के लिए झारखंड उच्च न्यायालय का रुख करना होगा. लालू प्रसाद के अधिवक्ता चितरंजन प्रसाद ने बताया कि अदालत ने तर्क आधारित निर्णय नहीं दिया है और वह जमानत के लिए अगले सप्ताह ही झारखंड उच्च न्यायालय में अपील करेंगे. फिलहाल लालू एवं अन्य सभी 15 दोषियों को बिरसा मुंडा जेल में ही रहना होगा.

(भाषा इनपुट)