
Gargi Santosh
गार्गी संतोष, जी मीडिया के India.com में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, हेल्थ, टेक्नोलॉजी, और ... और पढ़ें
दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में आज एक अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, राज्यसभा सांसद मीसा भारती और लालू यादव के दोनों बेटों तेज प्रताप और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय किए हैं. इस केस में 98 आरोपी थे, जिनमें से 52 को सबूतों के अभाव में आरोपमुक्त कर दिया गया. वहीं, 5 की मृत्यु हो चुकी है, अब बाकी के बचे 41 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलेगा. कोर्ट के फैसले के बाद, अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है? चलिए आपको इस खबर के माध्यम से बताते हैं…
जमीन के बदले नौकरी घोटाला, जिसे ‘लैंड फॉर जॉब स्कैम’ नाम से भी जाना जाता है. उस दौर का मामला है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार में रेल मंत्री थे. यह समय 2004 से 2009 के बीच का है. आरोप है कि लालू यादव ने इस दौरान रेलवे में ग्रुप D की नौकरियों के बदले कुछ लोगों से जमीन ली थी. कहा जाता है कि जिन लोगों ने जमीन दी या उनके परिवार वालों ने जमीन ट्रांसफर की, उन्हें या उनके रिश्तेदारों को रेलवे में नौकरी मिल गई.
इस मामले में यह भी आरोप है कि रेलवे भर्ती के नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया. आरोपों के मुताबिक, जमीन या तो बेहद कम कीमत पर ली गई या फिर कागजों में उसे गिफ्ट दिखा दिया गया. इसके बदले में संबंधित परिवारों के लोगों को नौकरी दी गईं. इस सबके लिए न तो कोई विज्ञापन निकाला गया और न ही सामान्य चयन प्रक्रिया अपनाई गई. इसी वजह से यह पूरा केस भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग का बड़ा उदाहरण माना जाता रहा है.
2020 में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बिहार और दिल्ली में लालू परिवार से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की. जांच में सामने आया कि पटना और उसके आसपास की कई कीमती जमीनें लालू परिवार के सदस्यों या उनके नियंत्रण वाली कंपनियों के नाम ट्रांसफर की गई थीं. इसके बाद, 18 मई 2022 को सीबीआई ने इस मामले में औपचारिक रूप से FIR दर्ज की और जांच को आगे बढ़ाया.
सीबीआई के अनुसार, यह घोटाला कई सालों तक चलता रहा और इसमें सुनियोजित तरीके से जमीन के बदले नौकरी दी गई. एजेंसी ने इस केस में पहली चार्जशीट 7 अक्टूबर को दाखिल की थी, जबकि आखिरी चार्जशीट 7 जून 2024 को पेश की गई. अब कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद मुकदमे की सुनवाई शुरू होगी. आने वाले समय में यह देखना होगा कि अदालत में सबूत किस दिशा में जाते हैं और इस हाई-प्रोफाइल मामले में आगे क्या कानूनी मोड़ आता है.
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