नई दिल्लीः दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का पूरे राजकीय सम्मान के साथ रविवार को निगमबोध घाट पर अंतिम संस्कार किया गया. शीला दीक्षित के पार्थिव शरीर का सीएनजी तकनीक से अंतिम संस्कार किया गया. दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अपने कार्यकाल में कई उपाय करने वालीं शीला की यह इच्छा थी कि निधन के बाद उनके शव को सीएनजी तरीके से जलाया जाए. शीला दीक्षित के परिवार के सदस्यों ने लकड़ियों से ही शव जलाने के अंधविश्वास को तोड़ते हुए यह कदम उठाया. इस सीएनजी शवदाह गृह की स्थापना भी खुद शीला ने अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल में किया था.

सीएनजी तकनीक से शवदाह से काफी कम प्रदूषण होता है और अपेक्षाकृत यह सस्ता भी है. लेकिन, अब भी दिल्ली की अधिकतर जनता शवदाह के पारंपरिक तरीकों यानी लकड़ी से शव जलाने को भी अपनाने हैं. उनका मानना है कि सीएनजी से शवहाद हिंदू रीति-रिवाज के खिलाफ है.

इससे पहले सैकडों की संख्या में शीला के समर्थक और चाहने वाले कांग्रेस का झंडा और हाथों में तख्तियां लिए तेज हवा और मूलसाधार बारिश की परवाह किए बगैर अपने प्रिय नेता की अंतिम झलक पाने के लिए सड़कों पर डटे रहे. संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कांग्रेस के शीर्ष नेता, केन्द्रीय मंत्री अमित शाह, दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मंत्री सत्येंद्र जैन शीला के अंतिम संस्कार में मौजूद थे.

शीला दीक्षित के अंतिम दर्शनों के लिए बडी संख्या में उनके प्रशंसक व समर्थक निजामुद्दीन पूर्व स्थित आवास पर पहुंचे. भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला दीक्षित को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सुबह उनके आवास पर गए थे. तिरंगे में लिपटा उनका शीशे का ताबूत जब सफेद फूलों से सजी वैन में रखा गया तो लोगों में उनकी अंतिम तस्वीर लेने की होड़ लग गई. पार्थिव देह को पहले कांग्रेस मुख्यालय लाया गया जहां संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कमलनाथ, अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद और राज बब्बर सहित अनेक लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की. इसके बाद पार्थिव देह को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस समिति के कार्यालय ले जाया गया. वह निधन से पहले तक प्रदेश कांग्रेस समिति की अध्यक्ष रहीं.

सैकड़ों की संख्या में शोकसंतप्त लोग उनके वाहन के साथ शवदाह गृह तक गए और बारिश की परवाह किए बगैर सीएनजी शवदाह गृह की चिमनी से धुंआ निकलने तक वहीं रहे. इस शवदाहगृह का उद्घाटन 2012 में दीक्षित ने ही किया था. इससे पहले दीक्षित को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकीं दीक्षित एक मित्र और एक बड़ी बहन के समान थीं. उनका निधन कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ी क्षति है. मित्रों और प्रशंसकों ने राष्ट्रीय राजधानी की मुख्यमंत्री के तौर पर 15 साल के उनके कार्यकाल के दौरान उनसे जुड़ी बातों को याद किया.

दिल्ली भाजपा के नेता हरीश खुराना ने याद किया कि जब उनके पिता मदन लाल खुराना को ब्रेन हेमरेज हुआ था तो दीक्षित उनके पिता को देखने आने वाली पहली शख्स थीं. कांग्रेस समर्थक नंद किशोर आनंद (51) ने कहा कि उन्होंने दीक्षित के निधन का समाचार सुन कर अपना सर मुडां लिया क्योंकि उनके लिए ‘मां’ के समान थीं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को दीक्षित के आवास पर जा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी . दिल्ली भाजपा प्रमुख मनोज तिवारी भी उनके साथ थे.

गौरतलब है कि तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं और राजधानी को आधुनिक रूप देने वाली वरिष्ठ कांग्रेस नेता का दिल का दौरा पड़ने से यहां एक निजी अस्पताल में शनिवार दोपहर निधन हो गया था.

(इनपुट-भाषा)