15 फरवरी को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 9.28 मिनट पर एकसाथ 104 सैटेलाइट को सफलता पूर्वक लॉन्च किया गया। इसी के साथ भारत ने बनाया एक नया विश्व कीर्तिमान जिसकी पूरी दुनिया में सराहना की गयी। लेकिन इसरो के पूर्व चेयरमैन जी माधवन ने चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि 104 सैटेलाइट लॉन्च करना ऐतिहासिक लेकिन इससे ISRO को नुकसान हो सकता है।

नायर कहते हैं- “मैं थोड़ा चिंतित हूं। इसरो ने जिस स्थान पर इन नैनो सैटेलाइट को स्थापित किया है, यह वही स्थान है, जहां हमारे भू-अवलोकन उपग्रह हैं, या होंगे।” नायर के मुताबिक नैनो सैटेलाइट्स की लाइफ बहुत ही कम होती है। जिसके बाद वे कचरा बन जाते हैं और अंतरिक्ष में उसी कक्षा में घूमते रहते हैं। एक ही जगह पर होने के कारण इनका इसरो के कई एक्टिव सैटेलाइट्स से टकराने का खतरा बना रहता है।

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इसरो ने रचा था इतिहासः
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक साथ 104 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजकर इतिहास रच दिया। उपग्रहों का प्रक्षेपण भारतीय रॉकेट ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के जरिए किया गया। जिन उपग्रहों को प्रक्षेपित किया गया है, उनमें देश का पृथ्वी अवलोकन उपग्रह काटरेसैट-2 सीरीज भी शामिल है। 44.4 मीटर लंबे और 320 टन वजनी रॉकेट पीएसएलवी-एक्सएल ने सुबह 9.28 बजे आकाश को चीरते हुए उड़ान भरी।

पृथ्वी अवलोकन उपग्रह काटरेसैट-2 सीरीज का वजन 714 किलोग्राम है। अन्य उपग्रहों में 101 नैनो उपग्रह हैं, जिनमें से इजरायल, कजाकस्तान, द नीदरलैंड्स, स्विट्जरलैंड व संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक-एक और अमेरिका के 96 और भारत के दो नैनो उपग्रह शामिल हैं। इन सभी उपग्रहों का कुल वजन लगभग 1,378 किलोग्राम था।