नई दिल्ली: विधि आयोग ने शुक्रवार को सुझाव दिया कि घर में महिला की भूमिका को पहचानने की जरूरत है और उसे तलाक के समय शादी के बाद अर्जित संपत्ति में बराबर का हिस्सा मिलना चाहिए, चाहे उसका वित्तीय योगदान हो या नहीं हो.

आयोग ने कहा कि सभी वैयक्तिक एवं धर्मनिरपेक्ष कानूनों में इसी के अनुसार संशोधन होना चाहिए. हालांकि, आयोग ने चेताया कि इसी के साथ इस सिद्धांत का अर्थ संबंध खत्म होने पर संपत्ति का ‘पूरी तरह से’ अनिवार्य बराबर बंटवारा नहीं होना चाहिए क्योंकि कई मामलों में इस तरह का नियम किसी एक पक्ष पर ‘‘अनुचित बोझ’’ डाल सकता है. आयोग ने ‘परिवार कानून में सुधार’ विषय पर अपने परामर्श पत्र में कहा, ‘‘इसलिए, इन मामलों में अदालत को विवेकाधिकार देना महत्वपूर्ण है.’’

आयेाग ने कहा कि शादी के बाद पति-पत्नी में से किसी भी पक्ष द्वारा अर्जित सारी संपत्ति को दंपति के बीच एक इकाई माना जाना चाहिए. पत्र में कहा गया कि महिलाओं को अक्सर परिवार का सहयोग करने के लिए अपने करियर से समझौता करना पड़ता है और वे घर के कामों में बड़ा योगदान देती हैं जिसे कभी भी वित्तीय संदर्भ में नहीं आंका जाना चाहिए.