नई दिल्ली. विधि आयोग ने सिफारिश की कि क्रिकेट समेत अन्य खेलों पर सट्टे को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर प्रणालियों के तहत नियमित कर देय गतिविधियों के रूप में अनुमति दी जाए. आयोग ने कहा कि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने के लिए स्रोत के रूप में इसका इस्तेमाल किया जाए.Also Read - मोदी सरकार को झटका, विधि आयोग ने कहा- देश में समान नागरिक संहिता की जरूरत नहीं

आयोग की रिपोर्ट ‘लीगल फ्रेमवर्क: गैंबलिंग एंड स्पोर्ट्स बेटिंग इनक्लूडिंग क्रिकेट इन इंडिया’ में सट्टेबाजी के नियमन के लिए और इससे कर राजस्व अर्जित करने के लिए कानून में कुछ संशोधनों की सिफारिश की गई है. आयोग ने सट्टेबाजी या जुए में शामिल किसी व्यक्ति का आधार या पैन कार्ड भी लिंक करने की और काले धन का इस्तेमाल रोकने के लिए नकदी रहित लेन-देन करने की भी सिफारिश की. Also Read - देश में एक साथ चुनावों के लिए सख्त कार्यढांचे की सिफारिश करेगा विधि आयोग, संविधान और कानून में करना होंगे बदलाव

कानून बना सकती है संसद
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘संसद सट्टेबाजी के नियमन के लिए एक आदर्श कानून बना सकती है. राज्य इसे अपना सकते हैं या वैकल्पिक रूप में संसद संविधान के अनुच्छेद 249 या 252 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए विधेयक बना सकती है. यदि अनुच्छेद 252 के तहत विधेयक पारित किया जाता है तो सहमति वाले राज्यों के अलावा अन्य राज्य इसे अपनाने के लिए स्वतंत्र होंगे.’ Also Read - बीजेपी ने विधि आयोग के समक्ष 50 मिनट तक 'वन नेशन वन इलेक्शन' के पक्ष में रखी अपनी ये राय

घोड़ों की रेस पर सट्टा लगता है
बता दें कि मौजूदा समय में केवल घोड़ों की रेस पर सट्टा लगाना ही कानूनी है. इस पर 28 फीसदी जीएसटी लगता है. आयोग का कहना है कि जिस तरह से घोड़ों की रेस को कौशलल आधारित खेल होने के नाते छूट दी गई है, ठीक उसी तरह दूसरे कौशल आधारित खेलों को भी सट्टेबाजी से अलग रखा जा सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सट्टेबाजी के कानूनी हो जाने पर इसका दुरुपयोग नहीं होता है.