कानून के क्षेत्र की जानी मानी हस्तियों ने राजधानी में लगातार बढ़ते जा रहे वायु प्रदूषण पर चिंता जताई है। इस बीच, सर्वोच्च न्यायालय तीन ऐसे अभिभावकों की गुहार सुनने जा रहा है जिन्होंने अपने बच्चों की तरफ से दशहरा और दीपावली में पटाखों पर रोक लगाने की अर्जी अदालत में लगाई है।Also Read - डोमिनिका की अदालत में भारत की पैरवी करेंगे हरीश साल्वे! मामले में आएगा नया मोड़

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तीन मासूमों, छह महीने के अर्जुन गोपाल और आरव भंडारी तथा 14 महीने की जोया राव भसीन ने अपने अभिभावकों के जरिए अदालत में दी गई अर्जी में कहा है कि उनके फेफड़े अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुए हैं। दशहरा और दीपावाली में पटाखों का इस्तेमाल राजधानी की पहले से ही बदतर हवा में और जहर घोलेगा और यह उनके और उन जैसे हजारों दुधमुंहे बच्चों की सेहत के लिए घातक होगा। Also Read - UP में 'लव जेहाद’ के खिलाफ योगी सरकार ला रही कड़ा कानून, गृह विभाग ने लॉ ड‍िपार्टमेंट को भेजा प्रस्‍ताव

वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा, “यह बहुत अच्छी अर्जी है। मेरी इच्छा है कि अदालत इसे स्वीकार कर ले। मैं यह नहीं कह रहा कि पूरे शहर में पटाखों पर रोक लगा दी जाए लेकिन इन्हें शहर के बीचोबीच में न चलने दिया जाए। क्यों नहीं कुछ सोसाइटी एक साथ किसी पार्क में इकट्ठा होकर कम घातक पटाखें जलाने का फैसला करतीं?”

संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक राजधानी में रोजाना वायु प्रदूषण से 80 लोगों की मौत हो रही है। साल्वे ने कहा कि हम उत्सव के नाम पर मौत नहीं परोस सकते। यह भी पढ़े – त्रिपुरा : उच्च न्यायालय ने कानून सचिव दातामोहन जमातिया को हटाया

मासूमों की अर्जी का समर्थन करते हुए वरिष्ठ वकील विजय पंजवानी ने आईएएनएस से कहा, “यह सभी की जिम्मेदारी है कि खतरनाक स्तर को पार कर चुके वायु प्रदूषण को कम करने में अपनी भूमिका निभाएं।”

सर्वोच्च न्यायालय में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले पंजवानी ने कहा, “धुएं में जहरीली गैस और पार्टिकुलेट मैटर्स (पीएम) होते हैं। ये सेहत के लिए घातक होते हैं।”

इस समस्या की मार सबसे ज्यादा बुजुर्गो और बच्चों पर पड़ती है। अन्य लोगों पर भी पड़ती है लेकिन युवा शरीर होने की वजह से इन्हें कुछ कम नुकसान होता है।

विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र के चंद्र भूषण ने कहा कि पटाखों पर रोक और सड़कों पर वाहनों की संख्या घटाना बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण कर लगाया जा सकता है क्योंकि एक सिद्धांत यह भी है कि जो प्रदूषण पैदा करे वह इससे निपटने की कीमत भी चुकाए।

चिकित्सक भी इन बातों से सहमत हैं लेकिन वरिष्ठ वकील अमन लेखी का कहना है कि कुछ दिन के लिए पटाखों पर रोक लगाने का कोई अर्थ नहीं है। यह बात सिर्फ ‘पब्लिसिटी’ के लिए कही जा रही है। पटाखे चलाना त्योहार का अभिन्न हिस्सा हैं। इनसे पैदा हुआ बुरा असर एक-दो दिन में खुद ही खत्म हो जाता है।