नई दिल्ली: वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखिका वर्तिका नंदा ने रविवार को कहा कि कई बार दबाव में नौजवान घातक कदम उठा लेते हैं, किसी से अपनी परिस्थिति साझा नहीं कर पाते हैं. ऐसी नई उभरती परिस्थितियों में समाज के समक्ष अवसाद गंभीर चुनौती उत्पन्न हो गई है.

अवसाद और आत्महत्या के विरुद्ध वरिष्ठ पत्रकार दयाशंकर मिश्र की वेबसीरीज ‘डियर जिंदगी- जीवन संवाद’ पर आधारित किताब ‘जीवन संवाद’ का यहां इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में विमोचन किया गया. वर्तिका ने कहा कि ऐसे युवा जब इस किताब को पढ़ेंगे तो इससे जीने का उनका हौसला बढ़ेगा.

इस मौके पर वरिष्ठ समालोचक डॉ. विजय बहादुर सिंह ने कहा कि ‘आत्महत्या और अवसाद’ जैसे विषयों पर यह किताब मनुष्य को दुखों से लड़ने की ताकत देगी. मिश्र की पुस्तक में वेबसीरीज के रूप में लिखे गए 700 से अधिक आलेखों में से चुनिंदा 64 लेखों को शामिल किया गया है.

प्रोफेसर पुष्पेंद्र पाल सिंह ने कहा, ‘‘हमें अपनी जीवनशैली को समय की जरूरतों के हिसाब से ढालने की जरूरत है. भारत में अभी लोग मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहुत सजग नहीं हैं. समाज के समक्ष इस महत्वपूर्ण चुनौती से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है.’’