नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि नोटबंदी ‘राफेल सौदे की तरह भारत के खिलाफ अपराध और एक बड़ा घोटाला है.’ उन्होंने कहा कि जांच कराकर दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए. कांग्रेस प्रमुख ने यह भी सवाल उठाया कि जब पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन नोटबंदी के फैसले से ‘असहमत’ थे तो उन्होंने इस्तीफा क्यों नहीं दिया. उन्होंने कहा कि राफेल सौदे में पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भी ऐसा ही किया था. उन्होंने ट्वीटर पर कहा, ‘राफेल (सौदे) की तरह नोटबंदी भारत के खिलाफ एक अपराध और एक बड़ा घोटाला था. पर्रिकर ने अपनी खाल बचाने के लिए राफेल से दूरी बनाये रखी.

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सुब्रमण्यन नोटबंदी के मामले में ऐसा ही कर रहे हैं. मुझे आश्चर्य है कि क्यों उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया जब वह इतने असहमत थे? चिंता मत करो भारत, दोषियों का पता लगाकर उन्हें दंडित किया जाएगा. इससे पूर्व हिन्दी में किए एक अन्य ट्वीट में गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘अच्छे दिन’ के वादे पर निशाना साधा और एक स्थानीय राजस्थानी द्वारा गाये गये एक गीत को टैग किया. उन्होंने हिंदी में किये अपने ट्वीट में कहा,‘राजस्थान के इस सज्जन ने देश के दिल की बात कह दी है. सुनिए, गाना जुबान पर चढ़ जाएगा.’ राजस्थान के इस सज्जन ने अपने गीत में मोदी के ‘अच्छे दिन’ के वादे पर निशाना साधते हुए कहा कि देश उनके लिए अभी इंतजार कर रहा है.

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गौरतलब है कि देश के पूर्व मुख्‍य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले की आलोचना करते कहा कि नोटबंदी का फैसला देश की अर्थव्‍यवस्‍था के लिए बड़ा, सख्‍त और मौद्रिक झटका था, जिसके कारण सात तिमाहियों में अर्थव्यवस्था की विकास दर खिसकर 6.8 फीसदी पर आ गई थी, जो नोटबंदी से पहले आठ फीसदी थी. सुब्रह्मण्यम नोटबंदी के वक्त यानी 8 नवंबर 2016 में ही सरकार के आर्थिक सलाहकार थे.

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डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक, सुब्रह्मण्यम ने कहा कि नोटबंदी एक बड़ा, सख्त और मौद्रिक झटका था. इसके बाद चलन में रहे 500 और हजार रुपये की मुद्राओं को वापस ले लिया गया था. चलन में रहे कुल मुद्रा में इन दो नोटों की हिस्सेदारी 86 फीसदी थी. इसके चलते सकल घरेलू उत्‍पाद यानि जीडीपी की विकास दर प्रभावित हुई थी.

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सुब्रह्मण्यम ने कहा कि वैसे तो जीडीपी रेट कई बार प्रभावित हुई है, लेकिन नोटबंदी के बाद इसे बड़ा झटका लगा. उन्‍होंने अपनी पुस्‍तक के एक अध्‍याय ‘द टू पजल्स ऑफ डिमोनेटाइजेशन- पॉलिटिकल एंड इकॉनोमिक’ में उन्होंने लिखा है कि नोटबंदी से पहले छह तिमाहियों में ग्रोथ औसतन आठ फीसदी थी, जबकि उसके बाद सात तिमाहियों में यह औसत 6.8 फीसदी रह गई. अपनी पुस्‍तक में पूर्व आर्थिक सलाहकार ने संकेत दिया कि नोटबंदी की घोषणा से पहले उनके साथ परामर्श नहीं किया गया था.